केवल पुष्पों की पौध लगाकर
खाद और पानी देना
कीटनाशकों का छिड़काव
सुंदर पुष्पों को उपजाना
यही वागवानी नहीं
वागवान है हर माता पिता
संतानों को लाना धरा पर
पर्याप्त नहीं
संस्कारों के खाद पानी
कुसंगति के कीटों से उन्हें बचाना 
आसान काम नहीं 
जो कर लेता 
वही वागवान यथार्थ 
ईश्वर सम 
कामवासना में सृष्टि बढाना 
कौन बड़ा काम 
सब कर लेते 
ज्ञानी, निरक्षर 
पशु, पक्षी भी 
वागवानी तो आराधना 
मोक्ष का द्वार
कवि का नाम : दिवा शंकर सारस्वत 'प्रशांत'