शीतल पावन कर दो ये तन, सिर पर हाथ तुम्हारा हो ,
तपन भरी इस श्रृष्टि में मां ,हर पल साथ तुम्हारा हो ,!!!

जूझ रहे सब हालातों से,ठंडा चूल्हा आंगन में ,
हर गरीब की कुटिया में मां, हर पल साथ तुम्हारा हो!!!

महामारी के इस प्रकोप से, चलती दुनिया थम गई,
इस समर को रोको हे मां,हर क्षण यही निवेदन है,

हुई आहट नववर्ष की,हर्ष मन में समा रहा ,
अपनो की तुम शरणागत हो,हर पल साथ तुम्हारा हो!!!

शीतलता की इस आष्टमी में, मन तेरे ही गुण गा रहा,
श्रष्ठी शीतल कर दो हे मां, हर पल साथ तुम्हारा हो!!!

करूं नमन मैं बारंबार ,भवसागर से कर दो पार,
सबके दुख मैं बांट सकूं ,इतना दो मुझे आधार ,
संघर्षों के कदम कदम पर हे मां,हर पल साथ तुम्हारा हो!!!

           कीर्ति चौरसिया
        जबलपुर (मध्य प्रदेश)