🌷🌷🌷🌷🌷🌷 ॐ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷
कैसी ये हवा चली है औऱ मचा है हाहाकार ,
डरा हुआ है हर एक व्यक्ति घर में बैठा है लाचार ,
सोचती हूं कौन करेगा,इस जगत का कल्याण ,
पाप पुण्य पे भारी है सब देख रहे है भगवान ,
कुछ तो उसने सोचा होगा होकर हम सबसे नाराज ,
खुदा बन रहा था हर व्यक्ति,फैला रहा था भ्रष्टाचार ,
संभल जा तू बंदे ना कर प्रकृति से खिलवाड़ ,
पाप का दोषी है हर व्यक्ति ,संकट में है सारा संसार ,
देवताओं की इस पावन धरती पर ,जन्मे राम कृष्ण अवतार
माँ दुर्गा की पावन धरा पे कन्या पूजी जाती देवी समान।
फिर भी हेमानव तूने,किया कन्या का अपमान
उन छोटी छोटी कन्याओं पर, तूने किया गंदा आघात ,
माँ गंगा भी ना छोड़ी तूने ,मैला किया उसे नरक समान।
मांस मदिरा पीकर तू तो, हो गया राक्षस समान।
स्वर्ग सी इस पावन धरा को भी किया तूने नरक समान।
कुदरत के इस उपहार को तूने,किया नरक समान।
कभी धर्म के नाम पर तूने,जीवो का किया संघार।
कभी आहार समझकर तूने,पशुओं पर किया अत्याचार,
कुदरत ने प्रकृति के रूप में,दिया हमे सूंदर वरदान,
संभाल ना सका मानव तूने किया घोर अपराध।
तेरे इन कुकर्मों से भगवान भी है हैरान
वो भी हैरान है परेशान हैं ,बना के इंसान।
आओ सिंह पर सवार माँ आदिशक्ति ,आवाहन करे।
कल्याण करे कल्याण करे ,माँ अब तो कल्याण करे।
गलती हो गई हमसे हम सब से, माँ हम को माफ करे,
पाप बढ़ रहा पृथ्वी पर ,हर पापी का सर्वनाश करे,
माँ आप आगे बढ़ हर पापी का संहार करे।
माँ ये जीवन दिया आपने अबआप पालनहार बनो ,
आओ मां अब पापो का संहार करो ....
संगीता वर्मा✍✍

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