⚘  ⚘ ॐ ⚘⚘
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कौन समझेगा भला दरदे बयां ये उसका,
अपने होकर भी यहां सभी पराए हैं ,
शुभचिंतकों ने ही शादी का बहाना लेकर--
उस के अरमानों को सूली पर चढ़ाए हैं,
जहर का घूंट पीकर के, रस्मो को सारी वो निभाएं है
खूबसूरत हाथों की उंगली में जब उसके-
हीरे की अंगूठी भी पहनाए हैं,
लगता है आज वह अंगूठी का नगीना,
जैसे जहर मे डुबो के लाए हैं,
कौन समझेगा भला दर्दे बयां ये उसका 
अपने होकर भी यहां सभी पराए है




                          संगीता वर्मा✍✍