पापा मैं, शहीद का बेटा हूँ, 
देश की खातिर, हुये आप शहीद, 
अब ये सपना है मेरा.....

बनूँ बड़ा होकर, मैं एक फौजी, 
पापा के जैसी, पहनूँगा मैं वर्दी, 
ये सपना है मेरा.....

पापा के जैसी, चाल चलूँगा मैं, 
गौरवशाली, इतिहास रचूँगा मैं, 
ये सपना है मेरा..... 

जग में वर्दी का, मान रखूँगा मैं, 
बेटा फौजी का, कहलाता हूँ मैं, 
ये सपना है मेरा..... 

धरती माँ की, रक्षा का भार होगा, 
मेरे बलशाली, मजबूत काँधो में, 
ये सपना है मेरा..... 

वीर माँ का, इकलौता, बेटा हूँ मैं, 
भारत देश के, काम, आ जाऊँ मैं, 
ये सपना है मेरा..... 

गर्व से सीना तान, दिख लाऊँ मैं, 
देश की खातिर, सीमा पे जाऊँ मैं, 
ये सपना है मेरा..... 

रिपु दल को, नाकों चने चब्बाऊँ मैं, 
उन्हें छठी का दूध, याद दिलाऊँ मैं, 
ये सपना है मेरा..... 

देश की  खातिर, कुरबानी, देने में, 
हटूं न पीछे कभी, न कतराऊँगा मैं, 
ये सपना है मेरा..... 

भारत का अपने, वीर जवान हूँ मैं, 
भारत का, परचम, लहराऊँगा में,
ये सपना है मेरा.....। 

      काव्य रचना -रजनी कटारे 
            जबलपुर (म. प्र.)