बहुत आसान है एक औरत पर रचना लिखना
मुश्किल है बहुत उसके मन के भावों को पढ़ना
क्या चलता रहता है उसके मन मे हर पल
मुश्किल है उसे जानना पढ़कर उसका मन।




कभी अल्हड़ सी तो कभी हिरनी सी जो तुम्हे लगती है
क्या उसके मन की बेचैनियाँ भी तुम्हे दिखती है
बहुत आसान है उसके तन की सुंदरता पे शायरी करना
मुश्किल है उसके मन का  हर भाव कागज पर लिखना।





जो दम भरते हो तुम सच्ची मुहोब्बत का
सारी उम्मीदें सिर्फ औरत से ही लगाते हो
हमेशा तो करती आई है आज भी करेगी तेरे लिए
तुम एक बार फिर उसी का समर्पण चाहते हो।




क्या कभी खुद को किया है समर्पित सात जन्मों के लिए
क्या कभी किसी एक को ही बसाया है दिल मे
तुम औरत की मुहोब्बत को क्या समझोगे
हर पल तो बस अपना ही सोचे जाते हो।




कैसी किस्मत इस औरत ने ही पाई है
दोस्त नही है कोई सभी जिस्म के सौदाई हैं
जब भी सोचे मिल जाए उसे भी एक सच्चा दोस्त
उसकी खुद की सुंदरता ही बीच मे आई है।


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कोमल भलेश्वर
हरियाणा