यूं ही चलते चलते श्याम मिल गए मोहे रस्ते में
मैंने भी पुछ ही लिया श्याम जब मिल जाते हो इतने सस्ते में
दुनिया क्यों पौथी लिए घूमें फिरे अपने बस्ते में

श्याम ने भी सुनकर मुस्कुरा दिया
जाते जाते मुझे कह गया
लाख सजा लो मंदिर महल
लाखों की दौलत का लगा दो ढेर
मेरे यहां दौलत की क्या कमी है
दौलत से कब मुझे जान पाओगे
खुली जो अंतर्मन की आंखे तुम्हारी
कण कण में मुझे ही तुम पाओगे
मैं तो बसता हूं खुदा के नेक बन्दे फरिश्ते में
तभी मिल जाता हूं पिंटू 'श्याम दिवाना' को सस्ते में।।

जानो मुझे तो मैं खुदी में खुदा हूं
ना जानो तो पिंटू पास होकर भी मैं जुदा हूं।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐