सायली छंद

प्रीत, 
पिय की,
हिय लगी री,
नहीं चैन,
पाये,

सजन,
की ऐसी,
लगन लगी री,
बैरन नींद,
सताये,

प्रीत,
की डोर,
सजन संग री,
काहे मोहे,
सताये,


पिय, 
बिन धरके, 
क्यों जियरा री,
का करहूं,
सखि,

आस,
लगी उनकी,
नैनन नीर झरत,
सूनी परही,
डगरिया ।

     काव्य रचना-रजनी कटारे
          जबलपुर (म.प्र.)