वो इश्क़ था हमारा
लेकिन अब है
किसी और का सहारा
लेकिन यारो उसे रकीब मत समझना
क्योंकि वो भी था मजबूर
हम चले ही थे साथ
कुछ कदम मिलकर
लेकिन वो रास्ते आगे
चलकर जुदा हो गए
एक दूसरे की आंखों से
देखे थे हमने ख्वाब
जो करने थे साथ पूरे
वो पूरे तो हुए
लेकिन फर्क ये था
कि उसके हाथ में
किसी और का हाथ था
और मेरी हथेली में
किसी और का नाम रचा था
जोड़ा पहना था हमने
किसी और की पसंद का
लेकिन चूड़ी की खनखन में था वो
उसकी हल्दी लगी थी
किसी और के नाम की
लेकिन उसकी सांसो में
समाया था इश्क़ हमारा
वो शामिल तो हो गई थी
उसकी जिंदगी में
लेकिन वो जिंदगी था हमारी
हमारी मांग में सजा तो
किसी और के नाम का सिंदूर था
लेकिन रूह में तो महक रहा था
इश्क़ उसका
कुछ ख्याब थे हमारे
जो देखे थे हमने साथ साथ
लेकिन अब हम दोनों ही है
किसी और के साथ साथ
रातें तो हमारी होती है
किसी और के नाम की
लेकिन ख्यालों में आज भी
शामिल होते है हम एक दूसरे के
तो बस इतनी सी थी कहानी यारो ....
जो अधूरी होकर भी पूरी हो गई थी !!!
डेडिकेट टू वि...एंड रोहित...
आशा करती हूं आप को ये नज़्म पसंद आई होगी ....ये मैंने किसी की रिक्वेस्ट पर लिखा है ।।।।
श्रेया सचान ✍️❤️

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