बेटा ! निशु का  खाना दरवाजे के बाहर ही रख देना।
भाभी ने अपने बेटे  के दोस्त वैभव से कहा -"ठीक है आंटी आप खाना निकाल दो" "।
 वैभव खाना लेकर निशु के पास गया और उसके लिए बोतल से पानी  निकाल कर दिया और  दो गज की दूरी पर चेयर लेकर बैठ गया । 
निशु खाना खा चुका , वह उसकी थाली लेकर नीचे आया। भाभी ने कहा -" तुम नीचे क्यों नहीं आए खाना देकर इस पर उसने जवाब दिया -" " आंटी मैं बाहर छत पर कुर्सी लेकर बैठा हुआ था। नीशु  ने खाना खाकर थाली बाहर कर दिया तो मैं थाली लेकर आ गया।
 निशु को टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव निकला था जिससे घर के लोगों को बहुत चिंता हो गई ।
निशु वैसे भी एक लैब में काम करता था और आजकल वह कोरोना की  जांच के लिए नियुक्त किया गया था ।
उसका रोज  बहत मरीजों के साथ ही रहना होता था। आज उसे कुछ परेशानी महसूस हुई और छींक भी आ रही थी अतः उसने भी अपना कोराना टेस्ट करा लिया और उसका रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आया।
 वह घर आकर फर्स्ट फ्लोर पर एक कमरे में आइसोलेट हो गया । भाभी को उसके खाने पीने की व्यवस्था की चिंता हुई क्योंकि भाभी बार-बार ऊपर नीचे नहीं आ जा सकती थी । उनके पैर में दर्द रहता था। इसी  समय निशु के दोस्त वैभव का फोन आ गया ।
 नीशु ने बताया कि वह कोरोना पॉजिटिव हो गया है।
थोड़ी देर बाद दरवाजे पर को किसी ने खटखटाया।
 भाभी ने दरवाजा खोला तो देखा कि निशु का दोस्त वैभव आया हुआ था।
 उसे देखकर भाभी उदास स्वर में बोली कि निशु को करोना हो गया है ।
वैभव ने भाभी को समझाया कि आंटी कोई बात नहीं है और आपको कोरोना का इलाज आसान है ।
बस जरूरत है थोड़ी सी सावधानी की और ठीक से खाना पीना और डॉक्टर ने जो दवाइयां दी है उसे समय पर लेने की ।
 उसने पूछा -""निशु कहां है ?  
 भाभी ने कहा कि छत पर ऊपर कमरे में मैंने उसके रहने की व्यवस्था कर दी है।
लेकिन अब खाना-पानी ले जाने की दिक्कत हो रही है क्योंकि मेरे पैर में दर्द रहता है।
 इस पर वह बोला कि आंटी आप चिंता मत करो मैं देखता हूं ।
" "नहीं बेटा तुम उसके पास मत जाना और  दरवाजे पर से ही बात कर लेना।""
 "ठीक है आंटी।"कह कर  वह ऊपर कमरे में चला गया ।थोड़ी दूर पर चेयर रखकर दोनों दोस्त आपस में बात कर रहे थे ।
दोनों ने मास्क लगाया हुआ था ।
बातों बातों में उसने कहा कि मैं रुक जाता हूं तुम्हारे साथ 14 दिन तक क्योंकि आंटी कैसे आ पाएंगी बार बार सीढ़ियां चढ़कर ।
 इस पर निशु ने कहा कि नहीं यार और कोई बीमारी होती तो कोई बात भी थी तुम रुक सकते थे लेकिन इस बीमारी में संक्रमण का बहुत अधिक खतरा रहता है।
लेकिन तुम्हारे खाने पीने की कैसे व्यवस्था होगी?
निशु " "एक, दो  दिन की बात होती तो कोई बात नहीं थी नहीं और चौदह  दिन तक तू परेशान हो जाएगा मेरे साथ "।
लेकिन उसने निशु की एक न सुनी और दूसरे कमरे में उसने अपने रहने का इंतजाम कर लिया।
 घर से जाकर अपने कपड़े और जरूरत का थोड़ा बहुत सामान लेकर आ गया ।
अब भाभी को बहुत आराम हो गया था।
 वह खाना बना कर दे देती थी और वैभव उसे ले आकर निशु को खिलाता था उसके बाद नीचे जाकर खुद खा लेता था। कभी कभी वह कहता था कि आंटी आप  मेरा भी खाना दे दो में छत पर बैठ कर खा लूंगा।
वह अपने दोस्त की  बहुत देखभाल करता था।
  उसको समय समय खाना,पानी  ,दवाइयां  इत्यादि देता रहता था। अपने दोस्त के साथ रहने से निशु को बिल्कुल अकेलापन नहीं महसूस हुआ और चौदह  दिन  बाद उसने टेस्ट कराया तो नेगेटिव रिपोर्ट आया निकला।
 लेकिन एक बात मैं बताना आप लोगों को भूल गई कि एक दिन निशु की बहन मिनी आई हुई थी भाभी से मिलने क्योंकि भाभी ने बताया था कि निशु  ऊपर वाले फ्लोर पर रहता है।
 भाभी ने चाय नाश्ता बनाया और बेटी से कहा कि तुम जाओ दरवाजे के बाहर  रख कर आ जाना ।
मिनी चाय, नाश्ता लेकर गई लेकिन वहां देखती क्या है कि दोनों दोस्त एक ही कमरे में बैठकर बातें कर रहे हैं ।
उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि एक कोरोना पेशेंट के पास कोई कैसे बैठ सकता है।
 उसने वैभव को बहुत डांट लगाई कि कहीं तुम्हारी तबीयत खराब हो गई तो। इस बात पर वह हंसने लगा और बोला-"दीदी मैंने कल ही अपना टेस्ट कराया है और मेरा रिपोर्ट नेगेटिव है ।
मिनी ने नीचे आकर भाभी को सारी बातें बताईं
बाद में भाभी भी उसको डांटने लगी।
आज नीशू ने बताया कि यह तो बस केवल सोने जाता था अपने कमरे में । बाकी समय दो गज की दूरी पर फेस मास्क लगाकर, मुझे और खुद को सैनिटाइज करके मेरे पास बैठ कर मुझ से गप्पे लड़ाता रहता था ।
मुझे चौदह दिन का बिल्कुल पता ही नहीं चला। मैं खुश रहता था कोरोना की तरफ मेरा ध्यान बिल्कुल जाता ही नहीं था । मैं भी अपने भतीजे का हाल चाल फ़ोन से लेती रहती थी। बाद में भाभी ने ये  बातें मुझे बताईं जिसे सुनकर  ऐसे दोस्त के दोस्ती के प्रति श्रद्धा से नतमस्तक हो गई।
आज के जमाने में ऐसे मित्र ?????

नोट: यह एक सच्ची कहानी है लेकिन किसी को ऐसा करने के लिए प्रेरित करना मेरा कतई उद्देश्य नहीं है।
ये ऐसी बीमारी है जिसमें स्वयं की सुरक्षा स्वयं के हाथों में है।

स्नेहलता पाण्डेय "स्नेहिल"
           नई दिल्ली