जिंदा इंसान भी मुर्दे की भाँति हो जाता है
जब उसे कोई समझने वाला नहीं होता है

उसे बात बेबात नीचा दिखाया जाता 
उसके साथ बेगानो सा बर्ताव किया जाता है

इसकी औकात याद दिलाया जाता है
उसे प्रताड़ित किया जाता है

उसकी भावनाओं की कद्र नहीं की जाती
खून के आँसू रुलाया जाता है

पाई पाई पैसो के लिए मोहताज किया जाता है
चंद खुशियां के लिए तड़पाया जाता है

दोष क्या इनका जो इन्हें हर वक्त तरसाया जाता है
जो हमेशा अपनो के लिए जीना चाहती है

उसे भरी महफिल मे जिल्लत क्यों किया जाता है
एक जीती जागती इंसान को मुर्दा बना दिया जाता है


शिल्पा मोदी✍️✍️