नितिन ने रोज की तरह नींद खुलते ही सिरहाने से  अपना मोबाइल  फोन उठाया और चैटिंग ऐप्स को खोल कर देखने लगा। नितिन जो यह कर रहा था आजकल लगभग सभी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है । अधिकांश लोग सोने से पहले और सोकर उठने के बाद सबसे पहले अपना मोबाइल फोन ही ढूॅंढते है । मैं यह नहीं कह रही हूॅं कि ऐसा करना गलत है । इस मोबाइल ने हमें बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई है । हम घर बैठे ही अपनों से  विडियो काॅलिंग पर जब चाहे तब बातें कर सकते है । यह मोबाइल ही है जो दूर रहने पर भी पास होने का एहसास कराता है लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो मोबाइल पर दूसरों को तो गुड मॉर्निंग भेजते है लेकिन अपने ही घर में वह अपनों को गुड मॉर्निंग कहना भूल जाते हैं ।  मोबाइल पर लगे रहने के कारण वह अपने अपनों के पास बैठ कर बात ही नही कर पाते है । नितिन भी उनमें से एक था । नितिन की पत्नी रेखा अपने पति में  इन दिनों आए बदलाव  से दुखी थी । नितिन जब भी घर में आता या तो वह किसी से बात कर रहा होता या किसी को मैसेज ही कर रहा होता था । कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि उसके हाथ में मोबाइल  रहता ही  था । रेखा अपने पति के साथ के लिए तरस गई थी । उसकी शादी को छ: महीने ही तो हुए थे । शुरू - शुरू में सब ठीक भी था लेकिन समय के साथ रेखा को कुछ भी ठीक नहीं लग रहा था । वह दिन भर घर के काम में लगी रहती थी । घर में सब उससे खुश थे । नितिन भी उससे खुश था क्योंकि वह नितिन की हर जरूरत का अपनी जरूरत से पहले ख्याल रखती थी । नितिन के घर में उसे कोई कमी नहीं थी । सास - ससुर भी अच्छे थे । वे भी नितिन के इस व्यवहार से खुश नहीं थे । नितिन के मम्मी-पापा ने कई बार नितिन को समझाया भी था कि तुम्हारे पापा और मैं हम तो एक-दूसरे के साथ बैठकर बातें करते ही हैं  लेकिन रेखा अकेली रह जाती है । तू सुबह जाता है और रात को वापस लौट कर आता है और जिस समय  यहाॅं  आता है  तू फोन से ही चिपका रहता है । बहू तेरी राह देखती रहती है और तुम दोनों जब खाना खाने बैठते हो तब भी तेरे पास मोबाइल रहता है और ना जाने तुम मोबाइल में क्या देखते  रहता हो  ??  बेटा ! यह मोबाइल फोन ही सबकुछ नहीं है । पहले लोग सुबह उठकर अपने परिवार वाले से मिलते-जुलते थे बड़ों को प्रणाम करते थे लेकिन अब तो उन्हें समय ही नहीं है । जो समय तुम्हें इस परिवार को देना चाहिए था वह तुम इस मोबाइल फोन को दे रहें हो ?? बहुत ग़लत कर रहे हो बेटा! इस मोबाइल फोन के कारण एक घर में  एक साथ बैठे हुए लोग भी आपस में बातें नहीं करते हैं क्योंकि वे तो दूसरों को खुश करने में लगे हुए रहते है । वे यह नहीं सोचते कि वह दूसरों को तो खुश कर लेंगे लेकिन क्या वे अपने को खुशी दे पा रहे हैं ?? इस मोबाइल फोन ने हमें अलग - अलग अनेकों प्रकार की  खुशी दी है  लेकिन साथ ही इसने अपने घर के लोगों को दिल से  बहुत दूर कर दिया है । तुम यह सोचते हो कि रेखा तो अपनी है , साथ रहती है और  इसे मैं सब प्रकार की खुशी देता हूॅं तो इसे क्या दुख है?? बेटा ! तुम्हारी  यही सोच ही इस परिवार और रेखा के दुखों का कारण है । अभी भी समय है अपने परिवार को वक्त दो ना कि इस मोबाइल फोन को । 
नितिन को अपनी मम्मी की बात सुनकर गुस्सा आ जाता है और वह कहता है कि पापा रिटायर होकर आ गए है इसलिए इनके पास सब काम के लिए टाइम ही टाइम है लेकिन मैं अभी रिटायर नहीं हुआ हूॅं । मुझे अपना बिजनेस इतना आगे ले जाना है कि रेखा को और हमारे आने वाले बच्चों को किसी भी तरह की आर्थिक तंगी का सामना नही करना पड़े जैसा मुझे अपने बचपन में करना पड़ा था । मैं अपने बिजनेस में लगा रहता हूॅं और उसके कारण हर वक्त  मेरे  हाथ में  मोबाइल  रहता है और मेरे मोबाइल चलाने से जब रेखा को कोई दिक्कत नहीं है तो आपलोगो को भी नहीं होनी चाहिए। 
नितिन की बातें सुनकर उसकी मम्मी ने आगे कुछ बोलना चाहा लेकिन उसके पापा ने उसकी मम्मी को इशारे से चुप रहने को कहा । नितिन की मम्मी चुप हो गई और वहाॅं से उठ कर अपने कमरे में चली गई । नितिन भी अपने मोबाइल फोन में लग गया और रेखा फिर से उसी अकेलेपन को महसूस करते हुए अपने घर के कामों में लग गई । वह नितिन से पूछना चाहती थी कि भले ही वह मेरे और हमारे होने वाले बच्चों के लिए ऐसा  करते हैं लेकिन क्या हम उनके ऐसा करने से हमेशा के लिए  खुश रहेंगे । मुझे और हमारे होने वाले बच्चों को पैसे तो मिल जाएंगे लेकिन अपने पति एवं पिता का प्यार और साथ तो नहीं मिल पाएगा । हम जिंदगी भर इसके लिए तरसते रहेंगे । ये पैसे और ये सुख - सुविधाएं जिसमें यह मोबाइल फोन भी शामिल हैं हमें क्षणिक खुशी तो दें सकते हैं लेकिन क्या यह हमें  आंतरिक खुशी  दे सकते हैं ???
रेखा जब कमरे में आई तो नितिन अभी भी जाग रहा था और उसके हाथ में मोबाइल था और साथ में थी चेहरे पर मुस्कराहट । रेखा ,  नितिन से वह सारी बातें कहना चाहती थी लेकिन  नितिन का गुस्सा वाला चेहरा उसकी नजर के सामने आ गया और वह चुप रह गई । नितिन ने मोबाइल देखते हुए ही रेखा से कहा कि सो रही हो ?? रेखा के हाॅं बोलते ही नितिन ने रेखा से कहा कि ठीक है सो जाओ । गुड नाईट । रेखा ने भी दुखी मन से नितिन को गुड नाईट कहा । सोते समय रेखा की नजर नितिन पर थी लेकिन नितिन की नजरें अब भी मोबाइल फोन पर ही थी । 



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                                                  धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻


   " गुॅंजन कमल " 💗💞💓