भोर भयो पनघट पे।
कन्हाई आई गयो रे।
पकड़े मोरी कलईयाँ।
चूड़ी सारी मोल गयो रे।

ये नटखट कान्हा। 
काहे आये मेरे पीछे-पीछे। 
कभी छेड़े गगरी।
कभी चुनरी पीछे से खींचे। 

आज तो यशोदा माँ से।
करूँ की शिकायत यो की। 
बहुत तंग करत है तेरा लल्ला।
समझा दियो यो की।

फिर देखो कैसे डांट पड़ेगी।
फिर ना तंग करेंगा कान्हा। 
माफ़ी मांगत आएगा मुझसे। 
जब मैया कान पकडेगी। 

नीलम गुप्ता 🌹🌹( नजरिया )🌹🌹
              दिल्ली