ये  हसीं  वादियां   देखूं  मैं,
ये  खुला  आसमां  देखूं मैं।
ये  हसीं   फ़िज़ायें  देखूं मैं,
हसीं  हवाओं  में  झूमूं  मैं।।

सुबह की किरणों की लाली,
है रंग हसीं यहाँ  पर  लाती।
शाम   चलें  हवायें   सुहानी,
खुशबुओं को  बिखेरे जाती ।।

ये  ऊंची   ऊँची   पहाड़ियाँ,
उस पर फैली बर्फ चादर सी।
नीचे   फैली  हसीं   वादियां,
गुलशन खिले हुये फूलों की ।।

शोभा इन हसीं वादियों  की 
चीड़, चिनार ,देवदार सही।
चेरी  चीड़, सेव, नासपाती,
अखरोट,बादाम यहीं होती।।



हस़ीन  सब  हस़ीं वादियों  में,
गुल ,गुलशन गुलफ़ाम हैं हसीं।
नदी , झील  और  शिकारे  भी,
हैं  हसीन  यहां  के  लोग  भी।।

जन्नत है जमीं पर कश्मीर की,
खूबसूरत   हसीन   वादियां ।
इन सुंंदर हसीन वादियों की,
देख शोखी  मैं  निहाल हुआ।।

--पेरी सूर्यनारायण मूर्ती "दिवाकर "