मेरी चाहत को दोस्ती का नाम दिया! 
अपने बेकाबू जज्बात को मैंने थाम लिया!! 
कहते हैं वो, दोस्त सबसे बढ़कर होते हैं! 
यह सुनकर हमनें, धड़कते दिल को लगाम दिया!! 


सच ही तो कहा उन्होंने, चाहत मेरी है, 
उन्हें क्यों कुशुरवार् ठहराऊ, कौन सा, 
उन्होंने, मुझे महबूब का नाम दिया
उनके दिल में बसी कुछ यादें पुरानी है!! 


किस हक से अपने दिल से दो चार कराउँ,उन्हें, 
उन्होंने  ना तो कोई हक ना ही एहसान लिया!! 
ये सदा उन तक पहुँच जाए तो मेहरबानी होगी!! 
अपनी कलम के साथ ही , उन्हें मोहब्बत तमाम दिया!! 

                श्वेता कर्ण