मन चाहे वर मांग रहा हूँ,
  करुँ मैं तुमसे अरदास...
जन का सेवक बनने आया,
  आकर राह दिखा भगवान...
मन चाहे वर......

हे भगवान! जगत के मालिक,
  उमदा भक्त बनाले...
नैनन की पानी सुख गई अब,
  जह्वां प्रान निकाले भगवान...
मन चाहे वर......

मन की चिंता उलझ गई है,
  नौका से पार लगादे...
सर्वज्ञ समाई है तुममें,
  अब मेरा भी भाग्य बना भगवान...
मन चाहे वर......

हाथ जोर,करुँ एक विनती तुमसे
  अच्छाई की आश जगादे...
मेंहक ऊँठू मैं पुष्पों की लाज़ से,
  ऐसा बाग बना भगवान...
मन चाहे वर......

      ✍लेखक:-विकास कुमार लाभ 
                         मधुबनी(बिहार)