थम गए जो नन्हें कदम..............
रह गए घरों में कैद,
जाने कब किलकारियां गूंजेगी
पाठशाला में इन नन्हो की ।।
थम गए जो नन्हें कदम................
कब आएगा वो वक्त
जब नन्हें बच्चों से होगी,
रौनक इन पाठशालाओ की ।।
थम गए जो नन्हें कदम................
सड़कों में थी चहलकदमी
पाठशाला जाते बच्चों की,
वक्त की कैसी?? ये बेरहमी ।।
थम गए जो नन्हें कदम.................
क्यों यह वक्त ऐसा आया
दिल भी ऐसा घबराया,
ये वक्त कोई ना समझ पाया ।।
थम गए जो नन्हें कदम................
पाठशाला भी तरसता होगा
इन नन्हों को देखने
आते कंधों में बैग लटकाए
भविष्य के सपने जो बुनने ।।
थम गए जो नन्हें कदम.................
रह गए घरों में कैद
जाने कब किलकारियां गूंजेगी
पाठशाला में इन नन्हो की ।।
✍️ मनीषा भुआर्य ठाकुर
कर्नाटक

2 टिप्पणियाँ