प्रणाम मां क्या कर रही आप,
मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो घर पर और सब कैसे है।
सब ठीक है आज अकेलापन बहुत खल रहा था मां ।
सब कहाँ गए क्या हुआ बेटा।
माँ बाबूजी सत्संग में , बच्चे स्कूल जा चुके हैं, जयंत ऑफिस अकेली करें भी तो क्या करें।
काम हो गया सब बेटा ।
घर का सारा काम निपटा कर गुमसुम से बैठ गई कोई भला टीवी भी कहां तक देखें मन बार-बार उदास हुआ जा रहा था और पलकें भीग रहीं थीं तो सोचा आपसे बात कर लूं।
सही किया जानवी बेटा।
आपको डिस्टर्ब तो नही किया मां मैने।
नहीं अच्छा किया जब भी उदास हो बात कर लिया करो।
जी माँ तभी तो की आपसे बात।
और सब कैसा चल रहा पापा भाई कैसे है।
सब अच्छे, आकर रह जाओ दो चार दिन ।
मन तो मेरा भी है पर बच्चों की पढ़ाई है।
अभी न चल रही फिर फोन से ही यो होती है।
हाँ वी तो है।
तो क्या मुश्किल मैं कहूंगी तेरी सास से भेज दें तुझे दो चार दिन को।
मैं बात करके बताती हूँ माँ।
बेटा सब ठीक तो है न ।
जी मां आप फिक्र न करो अब फोन रखती हूँ प्रणाम माँ।
ठीक है सदा खुश रहो।
तभी उसकी नजर शायद में पड़े स्मार्टफोन पर कई और उसने फोन को उठाया फेसबुक खोली फिर मैसेंजर पर hi कई बार लिखा देखा, अरे इतने सारे मैसेज किसके हैं उसने जब मैसेंजर खोला तो देखा कोई अनजान नंबर से ,
हाय हाय कैसे हो तुम ।
तीन चार बार लिखा हुआ था जानवी ने टच किया तो मैसेज खुल गया एक ही व्यक्ति की 5 दिन के मैसेज थे और एक मैसेज तो बहुत ही पुराना था ।
पर वह कौन है वह तो से जानती भी नहीं और मैसेंजर पर तो मैसेज उसी का आता है ना जो फेसबुक पर फ्रेंड होता है फिर उसने उसका नाम देखा नाम लिखा हुआ था ,
नवदीप सिंह उसने दिमाग पर बहुत जोर दिया पर यह नवदीप सिंह उसे याद नहीं आ रहा था कहीं गलती से तो उसने किसी को फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं कर ली थी चलो जो भी है उसने फोन फिर बंद करके रख दिया ।
जयन्त को फोन मिलाया,
हैलो आप क्या कर रहे,
अभी बिजी हूँ ,
बस 2 मिंट चाहिए,
कहा न फोन रखो अभी।
शायद बिजी हैं सोचकर मन को समझा लिया,
शाम को सोचा जयंत से बात करूंगी फिर उठकर थोड़ा इधर-उधर घुमी पेड़ पौधों को पानी लगाया सासूमां से बातें की और फिर शाम को बच्चे जयंत भी आ गए तो बिजी हो गयी काम मे सब निपटा कर जयंत रूम में पहुँची तो जयंत अपने लैपटॉप पर बिजी था जानवी जब काम निपटा कर आई जयंत को लैपटॉप पर बिजी देखकर चिढ़ गई क्या तुम हर वक्त लैपटॉप पर ही लगे रहते हो मेरी तो कोई सुनता ही नहीं बिल्कुल अकेली हो कर रह गयी हूँ मैं अच्छा तुम्हारा प्रमोशन हुआ है काम काम ।
जयंत बोला अरे काम नहीं करेंगे तो फिर आपकी फरमाइश पूरी कहां से करेंगे मैडम जी ।
जानवी चिढ़ कर बोली मेरी इतनी भी कोई फरमाइशें नहीं है चलो मुझसे बात करो ।
जयंत रिक्वेस्ट करके बोला अरे रुको ना प्लीज थोड़ा सा काम रह गया है ।
ठीक है करो अपना काम जानवी मुंह फुला कर बैड के साइड में बैठ गई ।
जयंत अरे बाबा गुस्सा नहीं हो सिर्फ 20 मिनट का काम है देखो नया प्रमोशन हुआ है मैं नहीं चाहता बॉस को कोई शिकायत का मौका मिले।
तो ठीक है करो काम मैंने कब मना किया मेरी शिकायतों का क्या उनका तो कोई असर ही नहीं आप पर ।
अरे नहीं ऐसा नहीं अभी आ रहा प्लीज थोड़ा सा मैनेज करो ना।
ठीक है कर रही हूं यह कह कर जानवी ने अपना फोन उठाया फिर एक मैसेज था उसने देखा,
हाय कैसी हो आप क्या कर रही हो ,
जानवी तुरंत जयंत से बोली जयंत मेरी बात सुनो देखो यह कोई नवदीप है जो मेरे मैसेंजर पर मैसेज कर रहा है हां तो होगा तुम्हारा कोई फ्रेंड कर लो बात ।
अरे मेरा कोई फ्रेंड नहीं है मैं लड़कों से दोस्ती नहीं करती ना ।
तो मेरा होगा कर लो बात
अरे बड़े अजीब हो आप ऐसे किसी से जाने कैसी बात करूँ मैं क्यों करूं जब तुम्हारा फ्रेंड है तुम ही बात करो ना।
अरे सब चलता है आजकल ठीक है कह कर जानवी मुंह फुला कर फोन पटक कर बैठ गई आधे घंटे का कहकर जयंत को पूरा एक घंटा लग गया जब मैं बेड पर जानवी सो चुकी थी सुबह उठकर वही भागदौड़ शुरू हो गई और जयंत सब भूल कर ऑफिस चला गया। बच्चे स्कूल मां बाबूजी सत्संग में चले गए सारा काम निपटा कर उदास बालकनी में बैठी थी तभी फोन की आवाज आई उसने फोन उठाकर देखा,
हाय कैसी हो आप,
फिर उसने,
हाय
मैं अच्छी हूं आप कौन आप मुझे जानते है ।
हां मैं आपके पति का दोस्त हूं ,
मेरा नाम नवदीप सिंह है।
पर वह तो कह रहे थे मेरा ऐसा कोई फ्रेंड नहीं है।
अरे बड़े आदमी हो गए हैं बाबूजी हम छोटे मोटे लोगों को कहां याद रखते हैं आप उसकी फेसबुक सर्च कर कर देखना मैं हूं उसका फ्रेंड में में हूँ।
ठीक है ,
और बताइए क्या हो रहा है।
कुछ न बैठे थे ,
तो आप फ्री हैं अभी।
फिर जब बच्चों की आवाज सुनी तो जानवी नेकहा
सॉरी मुझे बहुत देर हो गई है मेरे बच्चे स्कूल से आ गए हैं ।
जी बिल्कुल आप जाइए कहकर उधर से भी बाय ,
और जानवी भी बाय बोलकर फोन रख दिया।
बच्चों के ड्रेस वगैरह चेंज करने में लग गई पर आज जानवी को समय का पता ही नहीं लगा मन में एक ताजगी सी थी वह काम मे लग गयी,
जयंत आया उसने खाना पीना सब खिलाकर जयंत फिर अपने लैपटॉप पर बिजी था बच्चों का होमवर्क करा कर बेड पर गई तो फोन में फिर मैसेज आया था वह फिर लग गई बात करने में,
क्या कर रही हो आप ,
कुछ नहीं बस सोने की तैयारी में हूं।
खाना खाया आपने ।
खाया ,
क्या बनाया था आज आपने जो भी बनाया था जानवी ने बोल दिया ।
अरे वाह भिंडी राय ता यह तो मुझे भी बहुत पसंद है।
तो आ जाइए आप जानवी ने प्यार से कहा।
हां हां बिल्कुल आएंगे और आपके हाथों का बना खाना भी खाएंगे एक बात कहूं,
जी कहिए ,
आप बहुत खूबसूरत हो।
अरे आपने कहां देखा मुझे।
वह आपके पति के साथ आपकी पिक लगी है ना वही देखी थी।
अच्छा थैंक यू।
आपकी आंखें बहुत सुंदर हैं पतले होठ ऊंची नाक कितना प्यारी तीखे नैन नक्श है ।
पहली बार किसी से अपनी इतनी तारीफ सुनकर मन प्रफुल्लित हो उठा शादी को पूरे 5 साल हो गए जयंत ने तो कभी उसकी तारीफ तो दूर कभी झूठ में भी उससे यह नहीं कहा था तुम पर यह अच्छा लगता है तुम ऐसा करो वैसा करो जानवी ने आज एक भी बार जयंत को लैपटॉप पर काम करने से नहीं रोका उसे अच्छा लग रहा था कि जितनी देर काम करें और वह नवदीप से बातें करती रहे फिर जब जयंत को उठते देखा तो उसने कहा बहुत रात हो गई है अब मुझे सोना है ।
आप भी सो जाइए स्वीट ड्रीम गुड नाइट के साथ दोनों ने वार्तालाप को विराम लगा दिया।
अब तो जानवी को टाइमपास करने का एक जरिया मिल गया था अब पूरे दिन उदासी से बेजारी से दूर हो गई थी फटाफट काम करती और करने बैठ जाती फोन पर चैटिंग ,
चैटिंग शुरू होते ही आसपास का सब भूल जाती ,
जयंत ने कभी इस बात को नोटिस नहीं किया ना ही उसने यह जानने की कोशिश की इतनी देर तक वह फोन हाथ में लेकर क्या करती है किससे बात करती है उसे तो बस पैसे कमाने की धुन थी बड़ा आदमी बनने की बच्चों को बड़ा आदमी बनाने की उसके इसी बड़े आदमी बनने की चाहत ने जानवी को उसे दूर कर दिया धीरे-धीरे जानवी नवदीप के बहुत करीब जाने लगी ।
जयंत को 12 दिन के लिए ट्रेनिंग पर जाना था उसने शाम को आकर जानवी को बताया जानवी पैकिंग कर देना।
क्यों कहां जा रहे हो,
मैं 12 दिन के लिए चेन्नई ट्रेनिंग पर जा रहा हूं ।
जानवी बहुत खुशी से कहा अच्छा,
अरे क्यों तुम बहुत खुश हो रही हो उदास नहीं हुई तुम हर बार की तरह,
उदास क्या हो ना तुम्हें तो जाना है आगे बढ़ना है फिर तुम ही तो कहते हो ना कि तुम मुंह लटका कर मेरी यात्रा में बाधा डाल देती हो मेरा दिमाग खराब कर देती हो तो मैं खुश हूं ।
जयंत ने खाना खाया और पैकिंग की जानवी ने बड़े प्यार से उसके साथ सारा सामान रखवा या सुबह 8:00 बजे की ट्रेन थी 5:00 बजे उठकर उसने खाना बनाकर पैकिंग कर दिया जयंत ने एक प्यार भरी थपकी देकर अच्छा चलता हूं कहकर अपना ख्याल रखना और बच्चों का घर का आप भी अपना ख्याल रखना कहकर ।
जानवी ने उसे बाय बोल दिया और वह निकल पड़ा 12 दिन की ट्रेनिंग पर उसके जाने के बाद फटाफट काम निपटाया और नवदीप से मैसेज का इंतजार करने लगी पर आज मैसेज नहीं आया तो उसने खुद ही हाय क्या कर रहे हो कहां बिजी हो सुबह से आप ।
तुरंत रिप्लाई आया मैं हूं ना तुम्हारे बहुत पास चलो आज तुमने मेरी कमी को महसूस तो किया ।
अच्छा जी इसलिए आपने सुबह से कोई मैसेज नहीं किया।
नहीं ऐसी बात नहीं है मैं थोड़ा ऑफिस के काम में व्यस्त था सुनो मुझे तुमसे कुछ कहना है जान भी हमें यह चैटिंग पर बात करते-करते पूरा एक महीना हो गया है मैं तुमसे मिलना चाहता हूं तुम्हें देखना चाहता हूं करीब से।
नहीं यह नामुमकिन है आसपास के सब लोग मुझे जानते हैं फिर मैं क्या कह कर आऊंगी हम फोन पर ही बात करते हैं ना ।
सुनो ना प्लीज चलो वीडियो कॉल करते हैं एक बार अपना चेहरा तो दिखा दो नहीं मुझसे नहीं होगा नहीं तुम्हें मेरी कसम आखिर हम दोस्त है इतना तो भरोसा कर ही सकती हो मुझ पर ऐसा जब बार-बार नवदीप ने कहा तो वह भी मान गई और उसका भी मन कर रहा था एक बार नवदीप को बहुत करीब से देखें ठीक है ।
मैं वीडियो कॉल कर रहा हूं ,
ओके कह कर उसने अपनी हामी भर दी ।
और नवदीप ने जब वीडियो कॉल किया तो वह नवदीप को देखती रह गई बहुत ही खूबसूरत काली आंखें घुंघराले बाल लंबा चौड़ा अच्छा शानदार व्यक्तित्व ,कोई भी देखे तो बिना आकर्षित हुए नहीं रह सकता पर वे झुकी झुकी पलकों से उसे देख रही थी।
और नवदीप भी उसे देखता ही रह गया वाह कितनी खूबसूरत हैं आप डीपी में लगी फोटो से भी कहीं ज्यादा मैं उसकी तारीफ करता ही जा रहा था मेरे तो भाग्य खुल गए आप जैसी दोस्त पाकर फिर दोनों पूरे 1 घंटे तक वीडियो कॉल पर बात करते रहे धीरे-धीरे जानवी भी उससे अच्छे से बात कर रही थी।और वे आपस में हर तरह की बात करने लगे थे 12 दिन में वह दोनों एक दूसरे के बहुत ही नजदीक आ गए थे जानवी का समय पंख लगाकर उड़ रहा था उसे पता ही नहीं चल रहा था ।
बस उसकी दुनिया कितनी रंगीन हो चुकी थी वह तो हवाओं में उड़ रही थी 12 दिन में पूरे पूरे दिन नव से चैटिंग करती खाना बनाते वक्त यहां तक कि बच्चों का होमवर्क कराते वक्त भी उसने बच्चों को ध्यान देना भी कम कर दिया उल्टा पुल्टा खाना बनाते और बैठ जाती चैटिंग करने 12 दिन बाद जयंत लौटा और जयंत का फोन आया।
मैं आ रहा हूं कल ड्राइवर के हाथ गाड़ी भेज देना ।
तब जानवी को एक अंदर से अजीब सा लगा मानो उसे जयंत का आना अच्छा नहीं लगा उसने बहुत रूखे स्वर में कहा ठीक है उसकी आवाज में वह उत्साह न था जो हर बार जयंती आने पर होता था जयंत ने उसे जब भी फोन किया तो उसने बड़ी बेरुखी से टालने वाले अंदाज में ही बात किया करती थी जयंत ने यह सब नोटिस नहीं किया क्योंकि वह वहां बिजी था 12 दिन बाद जयंत लौट कर आया तो जानवी ने उसे जब खाना परोसा तो वह बहुत गौर से जानवी के चेहरे को देख रहा था उसके चेहरे पर अद्भुत तेज चमक थी बहुत ही ज्यादा खुश है वह सोचा शायद मेरी आने की वजह से जानवी बहुत खुश है। वह खाना खा रहा था तो उसने देखा आज खाने में कुछ भी उसकी पसंद का नहीं था जयंत थोड़ा उदास हो गया फिर वह रूम में आया उसने जानवी का फोन वहीं पढ़ा था तभी दो-तीन बार मैसेज आए उसने फोन को उठा कर देखा तो उसमें बहुत सारे मैसेज देख लिए , कहां हो यार मैं 4:00 बजे से तुम्हारा वेट कर रहा हूं इतने बिजी कहां हो क्यों फोन नहीं उठा रही जानवी मुझे तुम्हारी बहुत चिंता हो रही है तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना बोलो ना प्लीज देखो मुझे बहुत ज्यादा चिंता हो रही है हां ना कुछ तो जवाब दो ना तुम।
मैसेज देखते ही आग बबूला हो गया पर उसने शांति से काम लिया जब जानवी भी काम निपटा कर आई तब उसने जानवी से बड़े प्यार से बात की पर वह कुछ अजीब सा रिएक्शन दी 12 दिन बाद वह घर आया था और जानवी का इस तरह का व्यवहार देखकर वह स्तब्ध रह गया यह सब क्या था क्या जानवी भी बदल गई थी फिर उसने जानवी से बहुत प्यार से कहा जानवी तुम्हें इतने दिन में मेरी याद नहीं आई, नहीं ऐसा नहीं है मैं तो आपको रोज बहुत याद करती थी,
अच्छा सच में ,
हां,
तो फिर तुम फोन क्यों नहीं करती थी मेरे लिए,
मैंने सोचा आप वहां जरूरी मीटिंग के का मीटिंग में गए हैं तो डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी उसने वह सफाई से झूठ बोल दिया पर जयंत सच्चाई को जान चुका था आखिर उसे गुस्सा आ गया बोला तुम झूठ बोल रही हो मुझसे यही वजह थी तुम्हारा मुझसे बात ना करने की या अन्य कोई वजह थी अरे और क्या वजह होगी।जयंत ने फोन उसके हाथ में दे दिया यह सब क्या है और कब से चल रहा है अरे तुम मुझसे इसीलिए बात नहीं करते बच्चे भी कह रहे थे कि मम्मा हमारा ध्यान नहीं रखती, मां और बाबू जी भी कह रहे थे कि तेरे जाने के बाद जानवी भी पूरे दिन फोन में लगी रहती काम तो ठीक-ठाक कर लेती थी मां ने मुझसे खुलकर नहीं कहा वह इतना नहीं समझते और मैं सब समझता हूं ।जानवी मुँह घुमाकर सोने लगी जयंत उसे पकड़कर मै कुछ पूछ रहा तुमसे सुनाई नही आ रहा तुम्हें।
और किससे बात करती हो तुम बात करने में कोई बुराई नहीं है पर यह तो जान लो कौन है ।
मैं किसी से बात नहीं करती वह तुम्हारा ही तो दोस्त है ना मेरा फोन दोस्त वही नवदीप सिंह।
मेरा इस नाम का कोई दोस्त नहीं है पर मैंने उस दिन तुमसे पूछा था तो आपने तो बोला था।
क्या बोला था मैंने तुम पागल हो इतनी पढ़ी लिखी हो कर कितने फ्रॉड हो रहे हैं ।
जानवी सिसक उठी और एकदम क्या करूं फिर मैं तुम्हें ऑफिस पैसा कमाना है बड़ा आदमी बनना है मुझे सिर्फ घर संभालना है बच्चे देखना है वो काम मैं जिम्मेदारी से करते हैं हम आखिर कहां जाऊं किसके पास जाऊं मैं भी तो इंसान हूं मेरी भी कुछ इच्छाएं होती है कभी बहुत कुछ कहने सुनने को मन होता है कभी दिल करता है कोई तो हो जो मेरे मन की बात सुने मेरी तारीफ करे ,पूछे मुझे क्या अच्छा लगता है ।शांति से उसकी बातें सुन रहा था हां मैं उससे बात करती हूं मुझे अच्छा लगता है उससे बात करना ध्यान रखता है कि मुझे कौन सी बात पसंद है कौन सी बात नहीं पसंद है वह ख्याल रखता है मेरा मैं कैसी हूं मेरी तबीयत कैसी है 5 सालों में तुमने दिया है कभी इन बातों का ध्यान तुमने कभी कहा तुम अच्छी लगती हो तुमने कभी कहा कि तुम यह साड़ी पहनी तुमपर अच्छी लग रही , बिंदी बड़ी लगाया करो, ऐसी लिपस्टिक लगाया करो, ऐसे बाल खोल कर चला करो ,नहीं तो मैं तो सिर्फ बच्चे पैसे घर बड़ा आदमी बनना है और रुतवा चाहिए,पर एक औरत को समय चाहिए उसका ध्यान रखने वाला एक पति चाहिए ना कि उसे ऑडर देने बाला बेशक तुम मुझे महंगी साड़ी लाकर नहीं देते हीरे मोती का हार लाकर नहीं देते तो कम से कम मेरा ध्यान तो रख सकते हो पर नही तुम्हारे पास दो पल मेरी बात सुनने के लिए।
मुझे सुकून देता है उससे बातें करना तो इसमें क्या बुराई है तुम ही तो कहते हो दुनिया आगे निकल चुकी है यह कहकर जानवी करवट लेकर सो गई ।
आज जयंत को अपने कहे पर और अपने किए पर बहुत पछतावा हो रहा था उसे लग रहा था जो जगह वह उसके इतने करीब होकर उसे दुनिया के सारे ऐसो आराम देकर ब्रांडेड कपड़े ज्वैलरी देकर नहीं बना सका वह इतने दूर बैठे इंसान ने चंद बातों से बना ली ,
आज जयंत की आंखें खुल गई थी और उसने निर्णय लिया था कि वह जानवी को उस व्यक्ति से बात करने से न रोकेगा तो किससे उसके घर में और दरार पड़ेगी एकदम वह नहीं चाहता था जानवी उससे अलग हो जाए धीरे-धीरे जयंत ने जानवी के साथ टाइम बिताना शुरू किया वह ऑफिस से जल्दी आने लगा उसे घुमाने ले जाता कभी-कभी उसकी तारीफ कर देता 1 दिन उसे फिर बाहर जाना पड़ा ।
और जानवी नव बातें कर रहे थे जानवी मुझे तुमसे मिलना है नवदीप ने कहा मैं तुमसे मिलना चाहता हूं।
नहीं ना।
नहीं इस बार तुम मना नहीं करोगी कल मुझसे मिलने आओ ना जानवी उसे ना नहीं कह पाए और वह हां बोल कर गुड नाईट अब सो जाओ सुबह मिलते हैं कहकर सो गए सुबह जब उठी तो उसने नव को गुड मॉर्निंग बोला और नव ने भी गुड मॉर्निंग बोल कर कहा आ रही हो तुम मिलने मैं तुम्हारा कोई बहाना नहीं सुनूंगा ।
हां हां आ रही हूं मैं जहां भी मिलना है हां तुम थोड़ा निकलो घर से हम आ रहे ,
नहीं नहीं तुम मुझे होटल का नाम बता दो ।
ठीक है होटल मून पैलेस में पहुंच जाना तुम ओके आज अन्वी बहुत खुश थी बड़ी फुर्ती के साथ उसने काम किया है आईने में बहुत देर तक खुद को सजाया संवारा और वह जल्दी फोन पर्स में डाला और पहुंच गई मून पैलेस पहुँची, सामने ब्लू जींस वाइट शर्ट में खड़ा था ना बहुत ही खूबसूरत लग रहा था नव ने उसका बहुत प्यार से स्वागत किया और चेयर खींचकर उसे विठाया दोनों बहुत देर तक बातें करते रहे फिर नव ने जानवी से कहा चलो मैंने एक रूम बुक किया है वहां बैठकर हम कुछ बातें करते हैं ।
रूम क्यों हम यही बात करते हैं ।
नहीं प्लीज चलो ना तुम्हें मुझ पर भरोसा है ना ।
हां हां क्यों नहीं हमें बात करते हुए पूरे 2 महीने हो गए मुझे भरोसा है तुम पर जान भी उसके साथ रूम की तरफ चल दी नव ने दो ब्लैक कॉफी का आर्डर दिया जब कॉफी आ गई दोनों बातें करने लगी जानवी को थोड़ा चक्कर सा आने लगा तब नव उसके बहुत नजदीक आ गया।
नव तो मेरी इतने पास क्यों आ रहे हो ।
क्यों मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूं ।
दोस्तों हो पर प्लीज थोड़ी दूर रहो न ।
नहीं अब दूरी बर्दाश्त नहीं होती मुझसे जब से तुम्हें तुम्हारी बेटी के स्कूल मे परेन्स मीटिंग में देखा दीवाने हो गए थे हम अरे कितनी मुश्किल से तुम्हारी बेटी से फोन नम्बर लिया अब कुछ न कहो कहकर उसने पर तभी उसने जानवी के चेहरे को हाथों में थाम लिया नहीं नहीं करते हुए जानवी बेहोश हो गई ।
शायद उस कॉफी में कुछ था जब जानवी को होश आया तो वह घर के बैड पर थी मां बाबूजी दोनों बच्चे उसके पास थे जयन्त भी वही बराबर में बैठा था जानवी को कुछ भी याद नहीं आ रहा था जब उसने दिमाग पर जोर दिया तो उसे याद आया वह तो नव से मिलने होटल में गई थी फिर सारी बातें उसको धीरे-धीरे याद आती चली गई और वह रोने लगी तभी मां और बाबू जी उसको पास आए अरे बेटा रो क्यों रही हो क्या हुआ तुम्हें चक्कर आ गया तो वह तो अच्छे को जयंत स्कूल पहुंच गया वरना तुम्हारी तबीयत बहुत खराब हो जाती और कोई भी हादसा हो सकता था ।
उसने जयंत को देखा जयंत ने कहा तुम लेटी रहो मैंने मां बाबूजी को बता दिया तुम बच्चों के स्कूल गयीं यो वहीं चक्कर आ गया तो स्कूल बालों ने फोन करके मुझे बताया मैं तुम्हें यहां ले आया।
चलो बच्चों बेटा सो जाओ कहकर जयन्त ने बेटी को गोद मे लेकर थपकी लगा दी वह सो गयी।
जानवी तुम कुछ खा लो तुम्हें पूरे 6 घण्टे में होश आया है ।
जानवी जयन्त के पैर पकड़ लिए मुझे माफ़ कर दो जी मुझसे गलती हो गयी मैं उसे पहचान नही पायी।
तुमसे नही गलती मुझसे हुई है, और हर उस पति से होती है जो पत्नी को समय न देकर , कपड़े और गहने देते हैं।कभी नही बैठते उनका हाल पूछने उनके साथ ,तुम अक्सर मुझसे शिकायत करती थी पर मैं ही समझ नही पाता था की औरत दौलत से कहीं ज्यादा तबज्जो देखभाल और भावुकता से कहे गए शब्दों को देती है।उसके साथ बिताए गए पल उसकी नजर में अनमोल हैं उसके सामने कोई भी गहना वेमाना है। वह सिर्फ तबज्जो चाहती हैं प्यार का, कहीं तो कोई खालिस थी जो कोई दूसरे को जगह मिल गयी अब कभी ऐसा नहीं होगा ।
मुझसे बहुत भी गलती हो गयी जो उसकी तारीफों के झूठे लवादे को ओढ़कर सुख और सुकून समझ रही थी।
आज मेरी समझ में आ गया औरत और मर्द का रिश्ता दो ही रूपों में पवित्र है,पिता और भाई।कोई किसी का दोस्त नहीं खासकर एक महिला और पुरुष की बातचीत का आधार महिला की तरफ से तो मित्रवत हो सकता है पर पुरुष का शायद कभी नहीं,
वो कहीं न कही स्त्रियों से अपेक्षा करते हैं अलग सन्तुष्टि की।
जयन्त ने मन ही मन प्रण लिया वो दौलत से ज्यादा अहमियत रिश्तों को देगा ,जब रिश्ते ही नहीं रहंगे तो किस काम की यह शोहरत,
जानवी भी सोच रही थी आज के बाद किसी से इतनी फ्री होकर बात नही करेगी ,हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है और चाहें कोई भी स्त्री कितनी भी पढ़ी लिखी हो ऊंचे ओहदे पर हो पर अपनी कुछ मर्यादाओं को खुद मे सहेजे रखना चाहिए।
जो मर्यादाएं संस्कारों को सुरक्षित रखती हैं उनको बनाए रखने में कोई हानि नहीं है हमारे समाज ने जो नियम बनाए कुछ सोचकर ही बनाए होंगे।
जयन्त ने आवाज देकर कहा अन्वी अन्वी सो गई क्या।
नहीं ।
तो सो बहुत रात हो गयी ।
एक बार फिर अन्वी ने जयन्त से सॉरी कहा।
जयन्त ने उसे गले से लगा लिया दोनों बड़ गए मीठे सपनों की ओर।
पर हर स्त्री को जयन्त जैसा समझदार पति नही मिलता इसीलिए हमें किसी से भी बात करते वक्त उसकी बातों में इतना नही खो जाना चाहिए कि सच झूठ को भांप ही न सकें और आँख मूदकर कहीं भी चल दें जब आँख खुले तो अंधेरे के अलावा बस पछतावा ही हाथ लगे।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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