राहें सुनी बाज़ार बंद हैं,महामारी का मचा द्वंद है,
अपनों से अपने दूर हुए,पड़ोसी के दरवाजे बंद हुए !!
सिक्के उन के चल रहे,जिसने तिजोरी भरी थी,
मिलने को उनसे तरस गए ,जिनसे खुशियां हरी थीं !!!
महामारी के इस प्रकोप से, अब कौन धरा को बचाएगा ,
स्वयं दूरी का ध्यान धरो ,वरना ये और प्रकोप मचाएगा !!
पहली लहर ने बहुत ढसा,अब दुजी लहर छाई है,
जिसने की लापरवाही ,उसकी शामत आई है!!
करोना की इस कथा को ,प्रतिदिन पढ़ते अख़बारों में ,
कर रहे लाख प्रयास, चिकित्सक बचा रहे कई जानों को !!!
कुछ देवदूत बन बैठें हैं,कर रहे नि स्वार्थ सेवा,
स्वास्थ्य सबका बना रहे, सफलता का मिलेगा मेवा !!
कोरोना के इस युद्ध में ,निश्चय विजय होना है,
जागरूकता और सावधानी से ही,फायदा सबका होना है !!!
कीर्ति चौरसिया
जबलपुर ( मध्य प्रदेश)

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