बरसों बीत गए वहाँ से बिदा हुए...
बरसों बीत गए अपना घर बसाये हुए...
न जाने क्यों शाम ढलते फिर वहीं पहुँच
जाता है मन...
माँ की आवाज सुनने को दिल तरसता है
आज भी...
माँ के खाने की बनी खुशबू से मन महकता
है आज भी...
पापा के काम से आना, साथ सबके एक प्याला
☕चाय का पीना...
पापा का सबको दिन ☀भर का हाल सुनना...
शाम को किसी न किसी महमानों का घर पर
आना,उनके साथ बैठ कर गप्पे लडा़ना...
मन अब कहता है मुझे तुम अब सपनों में जी
लिया करो...
वो दिन न लौट कर आएगें कभी...
तुम यादों में ही उन दिनों के यू ही जी
लिया करो...
पर मैं कहतीं हूँ शाम को तुम न ढल जाया
करो...
और एक मेरी यादों तुम न कभी वो वक्त की याद न कराया करो.....!
🌱🌱मनु ✍🏻


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