बेटा तू अनमोल तोहफ़ा है, आज खुशियों का मौसम आया।।
तुम हो हर्ष और खुशियाँ मेरी, मैं श्वेता महतारी तेरी।
मैंने तो तुमसे ही मातृत्व का प्रथम स्पर्श भी पाया है।।
तुम ही तो हो खिली जो मुस्कान मेरे होठों की।
तुमने ही तो मेरी जीवन बगिया को महकाया है।।
सुख-सम्पति से परिपूर्ण जीवन, बढ़ नेक राह पर लक्ष्य पाओ।
दिल से निकले यही दुआ अब, हर जन्म में बेटा बन आओ।।
जब भी तुमको याद आ जाऊँ, नज़र तुम्हें उस क्षण आ जाऊँ।
बाधाओं से न घबराना, अडिग हिमालय सा बन जाना।।
बार-बार तेरा जन्मदिन आये, हर-पल तू यूँ ही मुस्काये।
सभी ने मिल दी है बधाई, तुम मम्मी-पापा के राजदुलारे।।
करती हूँ दुआ मैं उस ईश्वर से, जग में तुम्हारा नाम खिले।
तुमको स्वर्णिम हर सपने का, हो सम्भव मुकाम मिले।।
गोद में लेकर करुँ दुआ, मेरी झोली में बस यही उपहार।
मेरे लाल सदा ही तुमको मिलता रहे अपनों का प्यार।।
श्वेता कर्ण

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