दोस्तों अगर आपको समय यात्रा करने को अगर अवसर मिल जाए तो आप सबसे पहले आप अपना भविष्य देखेंगे । .
उस भविष्य में जाकर उसे सुधारने का प्रयत्न भी करेंगे अगर आपको अपने अतीत में जाने के लिए आपको केवल एक साल का वक्त मिले .... .
तो आप हर हालत में अतीत में घटी घटनाओं को सुधारने का प्रयत्न करेंगे, संभवत अगर मुझे ऐसा आश्चर्यजनक अवसर मिले तो शायद मैं भी अगर मिले तो ...?
आप सबसे पहले आप अपना भूतकाल अर्थात अतीत बदलेंगे लेकिन यह तो नहीं बदल सकते लेकिन यह दावा कर सकता हूं वह भी 100% जी हां आप अपनी मेहनत और सार्थक प्रयास से अपना भविष्य काल समय पूरा का पूरा विधिवत बदल सकते हैं, वह भी समय के साथ चलके ... . . . . .
आपका सवाल होगा हां भाई बदल तो सकते हैं, लेकिन तुम्हारी राय में तुम्हारा लेख क्या कहता है .....मेरी अनुसार जो हम आप अभी से संयोजित समय का यथाशीघ्र पूर्वानुमान लगाकर अपनी प्रत्येक गतिविधि कुछ आपत्ति आलस्य और बेमतलब के मोह को छोड़कर वास्तविकता के मन रूपी आत्मा के कथन के साथ प्रत्येक पल भविष्य में रख सकते हैं। . .
अथवा रख सकेंगे... इससे यह होगा आप अपने हाथों अपनी तकदीर बदल कर आने वाले समय में बहुत शांति वा जन्नत का सुकून महसूस करेंगे ? .
एक आम आदमी अपनी जिंदगी में बस यही अपेक्षा चाहता है ,जैसे अच्छा चरित्र, अच्छा स्वास्थ्य, अच्छे रिश्ते-नाते ,व्यवहारिकता प्रत्येक वस्तु का सामंजस्य स्थापित करना और यह यह आपके हाथों में निर्भर है । . . .
आपका सवाल होगा अगर हम अतीत को चुनौती देकर उस में फेरबदल करना चाहे तो क्या मेरी कल्पना क्या होगी सत्य /असत्य ? .
उत्तर यह तो नहीं होगा क्योंकि यह अनिश्चित है ,लेकिन में आपका मन भी नहीं तोड़ना चाहता और ना ही मिथ्या लेख लिखकर अपना और आपका समय व्यर्थ करना नहीं चाहता , तो हां जी आप अतीत को चुनौती देकर उस में फेरबदल कर सकते हैं। लेकिन सवाल है कि आप अतीत में कैसे जाएंगे....?
भाई आप उस समय में पहुंच ही नहीं पाएंगे, तो निराश ना हो अभी भी मनुष्य अपने चेतना संयम मोहे रूपी इंद्रियों पर महारथ हासिल कर अपना वास्तविकता का गुजरा हुआ। अतीत पूरा का पूरा एक कहानी की तरह वह भी लाइव देख सकता है । पर यह 100 में से कुछ गिने-चुने बुद्धिजीवी जो संयम की शक्ति को पहचानते हैं वे लोग ही कर सकते हैं जी हां आप मेरे जवाब से कुछ ही प्रतिशत संतुष्ट हो गए होंगे चलिए यही सही .... . आखिर अतीत के एक पन्ने आखिर खोल ही देता हू , सत्य तो सत्य होता है दोस्त कड़वा है लेकिन बोल ही देता हूं बहुत से वैज्ञानिक आज से 300 से या 500 साल पहले की एक बात कहता हूं । .
उस समय एक से एक वैज्ञानिक ने जन्म लिया था , तो आपको बता दे उन्होंने अपनी कोशिश से समय यात्रा टाइम मशीन बनाने की कोशिश भी की निकोला टेस्ला और अन्य वैज्ञानिक टाइम मशीन की प्रतिस्पर्धा में खोज पर खोज कर रहे थे अब सवाल है मशीन ने काम किया होगा अथवा नहीं... .
लेकिन कुछ वैज्ञानिक हुए जिन्होंने जीवन काल में ही एक से एक आश्चर्यजनक खोज करके दुनिया को सोच में या अचंभित में कर डाला आप सोच रहे होंगे कि दोस्त तुम हमेशा लंबी-लंबी फेंकता है सत्य
तो कड़वा होता है,.
क्योंकि मंथन में सत्य से पहले विष भी निकला था दोस्त... इसलिए थोड़ा बहुत कड़वा लगता है तो मे अमुक वैज्ञानिक की चर्चा कर रहा था . जी उस समय एक वैज्ञानिक थे निकोला टेस्ला वे दुनिया के ऐसे वैज्ञानिक हुए जिन्होंने पूरा का पूरा डायग्राम पहले अपने माइंड में हल करके उस पर दिन रात प्रयोग करते रहते थे । .
और बाद में ही भी सफल होते थे ।लेकिन उनकी भी एक मजबूरी थी, वह थी पैसा की कमी उन्होंने बिजली और टाइम मशीन जैसी खोज भी बनाई। यह देख अन्य वैज्ञानिक दंग रह गए और तो और उन्होंने बारिश करने वाला यंत्र तक बना डाला,. इतनी बड़ी बड़ी खौज आज के समय में आम वैज्ञानिकों को मात्र कल्पना मात्र होंगी सोचिए उस समय उन वैज्ञानिकों की बुद्धि कितनी तीव्र चलती होगी ?
कहते हैं कि जो आप अपनी कल्पना में सोचते हैं वह कहीं ना कहीं ब्रह्मांड में किसी न किसी जगह वह घटना वह तथ्य अवश्य पहले मौजूद होता है या होगा।
बात कर रहा था निकोला टेस्ला की
और वो इस पर 80 से 90 फ़ीसदी सफल भी हुई है पूरा का पूरा प्रैक्टिकल करके भी दिखाया यह देख अन्य वैज्ञानिक बहुत जलने लगे और बहुत से वैज्ञानिक अपनी असफल
दुश्मनी के कारण निकोला टेस्ला को अपनी खोज रोकनी पड़ी यही तो होता है जब कोई अकेला एक प्रयास या मुहिम
चलाता है। कभी कभी कभी जलन के कारण एक पर सो सो वैज्ञानिक टूट पड़ते हैं , आप चाहे तो निकोला टेस्ला की जीवनी यूट्यूब पर देख सकते हैं। कैसा लगा निकोला टेस्ला का कुछ आविष्कार आप शायद विश्वास नहीं
करेंगे इसलिए आप एक बार यूट्यूब पर अवश्य देखिए। लिखने को तो बहुत सारे रजिस्टर भरे पड़े हैं। .
दोस्तों लेकिन थोड़ा ही सही ...?
✏........लक्ष्मीनारायण,
सागर मध्य प्रदेश से।

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