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तुम हो तो हर जगह हसीन वादियां हैं,
तुम हो तो तनावो से भी आजादिया है,
मेरे अल्फाजों को जब दिल से सुना करते हो,
और मेरी कमियों को जब अनदेखा,किया करते हो ,
अपनी बाहों का जब तुम तकिया बना देते हो,
प्यार से मेरे तुम गालों को सहला देते हो,
मन ही मन यह बातें मुझे लुभाती हैं,
आज भी नया होने का एहसास दिलाती है,
वो नोकझोंक वो तुम्हारी शिकायतें वो नादानियां,
मुझको तो चारदीवारी में भी लगती है हसीन वादियां,
मेरी मुस्कान पर जब तुम फिदा हो जाते हो,
बोलते कुछ भी नहीं आंखों से बोल जाते हो,
छेड़कर मुझको तुम जब मेरी हंसी बनाते हो,
कभी नीम तो कभी मीठा शहद बन जाते हो,
मन ही मन मैं भी नाटक दिखाती हूं,
झूठ मूठ ही सही मैं तो रूठ जाती हूं,
अब तो आदत सी हो गई है ऐसी बातों की---
तुम्हारे बाहों के तकिए की, तुम्हारी कसेली बातों की, 
छेड़कर मुझको जब खुद ही रूठ जाते हो---
नखरे करते हजार और नहीं मुस्कुराते हो,
इस मुस्कान से मेरे घर की दीवारें जगमगाते हैं,
अंधेरे में भी चांदनी रात का एहसास दिलाती है,
तुम हो तो घर में भी हसीन वादी है,
इन बाहों के तकिए में बीत जाए जिंदगी---
तुम्हारी एक मुस्कान से मेरी तनावो से आजादी है,
तुम हो तो हर जगह हसीन वादियां है ,
तुम हो तो तनावो से भी आजादिया है


संगीता वर्मा✍✍