समुद्र की गहराइयों से भी गहरा ज्ञान
प्रेमी को पाने में बाधक ज्ञान का अभिमान
निराकार निर्गुण ब्रह्म को माने भगवान
स्वयं ईश्वर को भी देने लगे ईश्वर का ज्ञान
उद्धव को जब हुआ ज्ञान का गर्व गुमान
कृष्ण ने लिख पत्र भेजा ब्रज धाम
गए थे उद्धव गोपियों को समझाने निराकार ब्रह्म का ज्ञान
करने लगे निर्गुण ब्रह्म का बखान
दोड़ी आई गोपियां कृष्ण के पत्र में कृष्ण को पाया
ढूंढ़ा अपना नाम पर नाम ना पाया
पुछा उद्धव से कहां लिखा है नाम बता दो
हमें अपने श्याम से मिला दो
कहने लगे उद्धव और समझाया
कृष्ण ने तुम्हें बिसराया
प्रेम भक्ति है मोह आसक्ति
निराकार निर्गुण ब्रह्म है आत्म मुक्ति
सुनकर गोपियां उद्धव को ले चली राधा जी के पास
सुनो राधा उद्धव कहते हैं कृष्ण नहीं तुम्हारे पास
राधा ने कहा उद्धव कैसी मुक्ति
विरह पीड़ा में मिलता है हमें आनंद
प्रेम में ही बसता है हमारा सच्चिदानंद
लताओं में है यमुना नीर में है
सखियों में है सखाओं में है
वृन्दावन के कण कण में है कृष्ण भगवान
नहीं चाहिए समुद्र सा गहरा तुम्हारा ज्ञान
प्रेम जगत का सार है उद्धो प्रेमी ही भगवान
अभिमान त्याग उद्धव राधे राधे गाने लगे
परब्रह्म परमात्मा श्री कृष्ण के सम्मुख राधे गुण गाने लगे
पाकर प्रेम रस प्रेमाश्रु बहाने लगे
समझ गए प्रेम विरह पीड़ा का ज्ञान
राधा के साथ है सदैव कृष्ण
कृष्ण के साथ है सदैव राधा पिंटू संसार को समझाने लगे।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐

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