महेश जी - सुनिये जी !  अगर आप बुरा न माने तो मैं आप से कुछ बातें कर सकता हू्ँ?
अरुंधति - जी ,कहिये! क्या बात करना चाहते हैं आप?
महेशजी- जी, मैं तो आपको पहचानता नहीं। पर मैं हर दिन अपनी इस पोती पिंकी को लेकर शाम को पार्क में जब आता हूँ, तो आपको भी इस बच्चे  के साथ यहाँ देखता हूँ।
वैसे आप आज इतना उदास क्यों हैं? 
अरूंधति - जी, कुछ नहीं! (अपने आंखों में उमड़ रहे आंसुओं को छिपाने की कोशिश करती है।)
महेश जी - जी,नहीं! आप कुछ छिपाने की कोशिश कर रही हैं। किसी बात को मन में दबाये रखने से मन बोझिल हो जाता है । वही अगर आप किसी दोस्त से कह दें तो मन हल्का हो जाता है। कह दीजिए ना ! वैसे,क्या  आपका नाम मैं जान सकता हू्ँ ?
अरुंधति - जी, अरुंधति, अरुंधति शर्मा!
महेश जी - अच्छा ! मेरा नाम महेश है, महेश द्विवेदी! मैं यहीं दिल्ली का रहनेवाला हूँ , यहीं बगलवाले  हाउसिंग बोर्ड के एच.आई जी  कॉलोनी में रहता हूँ। मैं दिल्ली वन विभाग में चीफ कन्जर्वेटर ऑफ फारेस्ट्स के पद पर रिटायर हुआ हूँ। आप अपने बारे में बताइये।
अरुंधति - जी, मैं यहीं पासवाले   "बृंदावन एनक्लेव " के अपार्टमेंट में मेरे बेटे के साथ रहती हूँ। मेरा बेटा रामसनेही वकील है और मेरी बहू अलका सरकारी स्कूल में टीचर है।
वह मेरा पोता रोहन है । रोहन  मेरे बेटे रामसनेही का इकलौता संतान  है। 
महेशजी - अच्छा, आपके पति के बारे में आपने नहीं बताया!
अरुंधति - जी, वह अब नहीं हैं। वे यहाँ जल विभाग में मुख्य अभियंता के पद पर काम करके रिटायर हुए और यहाँ बृंदावन एनक्लेव में फ्लैट खरीदकर रह रहे थे। अभी दो साल पहले उनका आकस्मिक देहांत हो गया।
(वह आंचल से मुँह ढंककर सुबकने लगती है)
महेश जी- माफ कीजिए, अरुंधति जी, आपका दिल दुखाना मेरा उद्देश्य नहीं था। 
अरुंधति - नहीं जी, ऐसी बात नहीं है। वो गुजरे पल याद आ गये तो दुख उमड़ आया।
महेश जी - अरुंधति जी, आप अपने मन की बात कह डालिये। किसी मित्र या आत्मीय से कहने से मन हल्का हो जाता है। मुझे अपना मित्र समझकर आप सब बातें कह दीजिए न !  वैसे आज क्या बात हुई कि आप इतनी दुखी नजर आ रही थी।
अरुंधति - (अपना मुँह आँचल में छिपाकर रो पड़ती है)
महेशजी- आप मत रोइये, अरुंधति जी! मैंने व्यर्थ ही आपका दिल दुखाया है। चलिये ,आज नहीं तो कल ही सही! हम एक दूसरे के  बारे में सुनेंगे। आप मेरी दोस्त बनोगे ना? ( खिलखिला कर हँसता है।)
अरुंधति - मैंने आपको दुखी कर दिया।
महेशजी -अरे ना,आपसे बातें कर थोड़ा सुकून मिला। शाम गहरा रही है। चलिये, कल फिर मिलते हैं। आइयेगा न ?
अरुंधति - जी!
                                                     ----क्रमशः