आसमां की तरह ऊंचे,शोहरत के होते सपने
     बुनते हैं लोग हजारों,जिंदगी में ऐसे सपने
       गर हासिल भी,कर लोगे ऊंचाइयों को
      जिंदा रखना,अपने अंदर अच्छाइयों को
        
          न स्वार्थ रखना,न गुमान करना 
      इक नेक इंसा की तरह,इंसा ही बनना  
  कुछ लोग बदल लेते हैं,शोहरत के लिए ईमान
      खुद को धोखा देते हैं,वो मगरुर इंसान
          चैन से जो खाये,रोटी ईमान की
        सुकुं रहे दिल में,बरकत अमान की
        कभी बेवजह कर लो,गैरों की मदद
   जिंदगी में बेशुमार मिले,दुआओं की अदद
   
   इक नेक इंसान को मिले,सम्मान की ऊंचा 

दौलत की चाह रखने वाले,मिलती सिर्फ तन्हाई।।
   शोहरत तो पाती है ,सिर्फ ईमान की सच्चाई
   शोहरत तो पाती है, सिर्फ ईमान की सच्चाई  ।।
          
                      मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)