दर्द में भी यह लब मुस्कुराते 
जातें हैं
बैठे हुए जब लम्हें पुराने याद
आ जातें हैं
जब आंखों से छलकते हैं वो
आंसू बन
मगर हम उन्हें भी गुनगुनाते
जातें हैं
नहीं परवाह करते हैं हम 
इनकी.... 
क्योंकि सीप में पड़ कर ये मोती
 से बन जातें हैं.... 
हम खुश है क्योंकि हमारे आंसू
जो बन गए हैं मोती.... 
वो किसी की गले की मोतियों
का हार बन जाते हैं.... 
हम जाया ही नहीं करते हैं इन
आंसूओ को.... 
क्योंकि ये भी बन मोती किसी 
की खुशियों का समान बन
जातें हैं....
क्योंकि खुशियों में भी हम मुस्कुरा
जातें हैं....! 



       🌴🌴मनु✍🏻