इतना भी आसान नहीं लोगों!
जज़्बातों को पन्नों पर उकेरना।
हर शब्द को लिखने से पहले,
असल में उसे जीना पड़ता है।
इतना भी आसान नहीं लोगों!
ये शब्दों के पिरामिड को गढ़ना
एक एक मंजिल जोड़ने से पहले,
ख़ुद को कई बार टूटना पड़ता है।
इतना भी आसान नहीं लोगों!
हर दिल के अहसासों को छू पाना।
स्याही की दवात में डुबोने से पहले,
कलम आसुओं में डुबाना पड़ता है।
...........✍️ ऋतु बाजपेई🌅🙏

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