यह कविता मैंने सन् 1980 में, जब मैं तीसरी कक्षा में थी, अपने स्कूल में सुनाई थी । इसके अलावा मुझे कुछ याद नहीं कि यह कविता मुझे कहां से मिली, किसने मुझे याद करवाई । अगर आपने पहले सुनी हो या कहीं पढ़ी हो तो कृपया मुझे जरूर बताना । मैं जानना चाहती हूं कि मेरे अलावा और कितने लोग इस कविता के बारे में जानते हैं ।
मच्छर हूं मैं मच्छर हूं
काटूंगा मैं काटूंगा
काट लिया जिसे एक बार
हो गया उसको मलेरिया बुखार ।
जा रे मच्छर जा रे तू
मैं एक साफ लड़की हूं
हवादार घर मेरा होगा
मुश्किल आना तेरा होगा
जहां जहां पानी खड़ा होगा
तेल मिट्टी का डालूंगी ।
मच्छर बोला, जय जय राम ।
लड़की बोली, जा शैतान ।

0 टिप्पणियाँ