बहुत साल पुरानी बात है, एक गावँ में एक बहुत बड़ी और खूबसूरत महलनुमा हवेली थी.... उसमें एक राजकुमारी रहती थी.....वो बच्चों को बहुत प्यार करती थी.... बच्चे भी उसे बहुत प्यार करते थे.....जिस बच्चे का भी दूध का दाँत टूटता! तो वो राजकुमारी वणिका आती... और उस बच्चे का दाँत लेकर.....एक सिक्का देकर चली जाती थी...... 

एक बार उसके घर में भयंकर आग लग गयी -जिसमें उसका चेहरा बुरी तरह झुलस गया...उसका चेहरा बहुत बदसूरत हो गया....उसे रोशनी में देखने में बहुत दिक्कत होने..... लगी .....अब उसने दिन में बाहर निकलना 
छोड़ दिया और चेहरे पर नकाब लगाकर बाहर निकलने लगी..... एक दिन गाँव के दो बच्चे खेल कर घर नहीं लोटे!! तो गाँव वालों ने राजकुमारी वणिका को दोषी ठहरा दिया और उसको पकड़ कर नकाब खोल दिया..... फिर उसे जलाकर मार डाला तभी उसने कहा.... जो भी मेरा चेहरा देखेगा वो बचेगा नहीं......मैं मार डालूंगी....... 

वो मरने के बाद चुड़ेल बन गयी थी..... लेकिन अभी 
भी वह जब किसी बच्चे का दूध का दाँत टूटता..... तो वणिका चुड़ेल दाँत लेने जरुर आती..... वो दाँत लेकर सिक्का देकर चली जाती.... किन्तु यदि भूल से भी!!
किसी ने चेहरा देख लिया.... तब वह उसे नहीं छोड़ती थी....जिस दाँत को वो.... इतने प्यार से लेकर जाती थी .....वही दाँत अब.... बदला लेने का.... जरिया बन गया था......... 

एक साहिल नाम के बच्चे का दाँत टूट जाता है, तो वो 
दाँत को टेबिल पर रख कर सोने लगता है....माँ प्यार करके सोने चली जाती है.... 
उसे खिड़की के पास ऐसा लगता है!! कि कोई है, वो 
उठ कर देखता है.... उसकी दोस्त शैली आ जाती है, 
वो बोलती है.... कल नदी किनारे अपन खेलने चलेंगे..... वहीं पड़ोस में रहती है शैली.. फिर वो चली जाती है....

साहिल सोने की कोशिश करता है, हवा बहुत तेज 
चलने लगती है....हवा की सरसराहट और अजीब 
सी आवाजें सुनायी देतीं हैं....वो समझ जाता है कि 
हो न हो चुड़ेल के आने की आहट है वो दाँत लेने आ 
रही है.......वो खूब ओढ़ कर आँखे बंद कर लेता है, 
उसे लगता है.... कोई टेबिल के पास आया तो धीरे से चादर के बाहर.... मुँह निकाल कर देखता है..... तो 
उसका चेहरा दिख जाता है...अब घबरा कर भागता है 
माँ माँ ऽऽऽ वो भी इसको पकड़ने को करती है.... पर गेलरी में पकड़ नहीं पाती....वहाँ लाईट जल रही थी उजाला फैल रहा था..... 

साहिल बहुत डर जाता है.....अब मुझे नहीं छोड़ेगी 
वो मैंने उसे देख लिया है.....नहीं बेटा कोई कुछ् नहीं करेगा तुम्हें..... डरने की कोई बात नहीं है.... 
चलो हम देखते है तुम्हारे कमरे में..... कमरे में अंधेरा रहता है पर चुड़ेल के चेहरे पर टार्च की रोशनी पड़ती है.... तो साहिल की माँ उसका चेहरा देख लेती है....वो स्वीच पर जैसे ही हाथ रखती है.... लाईट जलाने !!तो चुड़ेल उसकी माँ का हाथ खींच कर उसे मार डालती है......

साहिल बहुत डर कर एक कोने मैं छुप कर बैठ जाता है.....चुड़ेल देख लेती तो बच्चा भागता है वहाँ से उसको बहुत खरोंचे भी आ जातीं है....
इसको टार्च दिख जाती है.... उठा कर झट चालू कर लेता है.... दूसरे कमरे में जाकर छुप जाता है...पुलिस आ जाती है....सारा इल्जाम साहिल पर लगा देती है..... तुम्हीं ने अपनी माँ को मारा है.... उसे पकड़ कर ले जाते हैं.... उसकी कोई सुनवाई नहीं होती.......

फिर कुछ समय बाद.... शैली के सबसे छोटे भाई का 
दाँत टूटता है....तो जब वो चुड़ेल रात में दाँत लेने आती 
है तो.... शलभ भी उसे देख लेता है-चुड़ेल इसे पकड़ती 
है मारने के लिए शलभ को काफी चोटें आती हैं...जगह जगह से खरुंच जाता है.....हल्ला गुल्ला....अजीब सी आवाजें सुनकर शैली... टार्च लेकर आती है.... रोशनी 
के कारण शलभ बच जाता है... वो भयानक चेहरे वाली चुड़ेल गायब हो जाती है..... कहती जाती है..... नहीं छोड़ूंगी ऽऽऽ.....

यहाँ जेल में साहिल बड़ा हो जाता है, जेल में सजा 
काट कर आता है..... दूसरे शहर में चला जाता है 
यहाँ पर सब यही कहते...... इसी ने अपनी माँ को 
मारा है..... शैली बहुत परेशान होती है... उसका 
भाई शलभ बहुत डरने लगा है..... जब देखो तब 
वो आ जायेगी.... मार डालेगी..... नहीं छोड़ेगी वो 
बहुत डरावनी.... बदसूरत है देखा मैंने.... उसे... 
नहीं छोड़ेगी मुझे........ 

शैली ने डाक्टरों को दिखाया, उसके बहुत सारे 
टेस्ट भी हुये.... सब ठीक....कोई दिक्कत नहीं है 
कुछ नहीं बच्चा है..... बुरा सपना देख लिया होगा 
दहशत बैठ गयी है फिर भी आपके कहने से हम 
आॅबजरवेशन में दो तीन दिन रख लेते हैं..... 

शैली किसी तरह से साहिल का नम्बर ढूंढ कर उसे 
फोन करती है..... बताती है सब.... मुझसे मिलो 
आकर....तो वो मना कर देता है.... पर फिर... साहिल खोजता हुआ शैली के बताये अस्पताल में पहुँच जाता है.... शलभ को देख कर... तुम ही हो शलभ..... 
हाँ आपको कैसे मालुम..... मैं जानता हूँ वो मुझे मार डालेगी..... तुम अंधेरे से डरते हो.... 
चेन से सो नहीं पाते.... हाँ दीदी कहती है बड़े होकर 
डर नहीं लगेगा....पर मुझे तो अभी भी लगता है... 
हाँ ये बात है बड़े होकर समझ आ जाती है... वो 
रोशनी में नहीं आती.... इसी कारण हमेशा अपने 
पास टार्च रखता हूँ.... 

इतने में शैली आ जाती है वो शलभ से लिपट कर 
कहती है इतने सालों से कहाँ थे.... बड़ी मुश्किल से तुम्हारा नम्बर मिला..... तुमको जैसा होता था....
वैसा ही इसको भी होता है... डाक्टर दवाई दे रहे हैं 
इलाज चल रहा है..... बिल्कुल बंद करो.... इलाज 
उसको कुछ नहीं हुआ है... इससे कुछ नहीं होगा.... 

शैली का मंगेतर आ जाता है, अरे तू कब आया, 
छूट गया जेल से.... अब किस को मारने आया है 
अपनी माँ को तो मार ही चुका है.... और कुछ भी 
करता है कि नहीं..... होटल में काम करता हूँ.... 
मैं तो पैशे से वकील हूँ..... कोई पुलिस को फोन कर 
देता है.... पुलिस पकड़ कर ले जाती है..... 
शैली उसको अंधेरे में नहीं रखना.... उसको मशीन में 
नहीं रखना..... नहीं तो चुड़ेल मार डालेगी..... 

पुलिस वाले ले जाकर साहिल को जेल में डाल देते हैं.....पुलिस वाला उससे कहता है.....अब तो तेरा 
वकील भी कुछ नहीं कर सकता...तो साहिल कहता है.... वो तो दो टुकड़ों में पड़ा है वो कैसे आयेगा ....तब पुलिस वाले को बड़ा आश्र्चर्य !! होता है.... ये तो मेरे साथ है इसको कैसे मालूम..... फिर साहिल वो घटना उसको बताता है........

इतने में ही बहुत तेज हवा सनसना के चलने लगती है.... जैसे आँधी आ रही हो.... वो आ रही है....देखना मत उसकी तरफ..... नहीं तो मार डालेगी..... तड़ तड़ बिजली कड़कने की आवाज लाईट गोल..... अंधियारीरात....सांय सांय..... खौफनाक..... सब जैसे तहस नहस हुआ जा रहा....साहिल..... मुझे बाहर निकालो...  पुलिस वाला साहिल को बाहर निकालता है.... साहिल जल्दी से अपने बेग से टार्च निकालता है....सब लोग टार्च लिएरहना.....
वो उजाले में नहीं आती....अंधेरे में तो थोड़ा सा हाथ भी होगा तो पकड़ कर खींच लेगी.... मेरी माँ को ऐसे ही 
खींचा था.... हाथ पकड़ कर.... 

चलो सब अस्पताल चलो बच्चे को भी बचाना है... वो डाक्टर उसे अंधेरी मशीन में रखने वाले हैं... उन्हें रोकना होगा.... जल्दी ही अस्पताल पहुँच कर पहले तो उसे मशीन से बाहर ले आते हैं....डा. चिल्लाता है गुस्सा करता है.... पर जब पुलिस वाला समझाता है तो वो शांत हो जाते हैं.... 

फिर वही खौफनाक आवाजें, हवाओं का तेजी से 
आँधी जैसे चलना.... तभी बच्चा.... वो आ गयी... 
मार डालेगी.... नहीं छोड़ेगी वो.... सब दहशत में 
आ गये.... लाईट चली गयी.... सब टार्च जला कर 
रखना.... उससे बचने का और कोई उपाय नहीं है 
टार्च धीमी होने लगती है.... केरोसिन से लालटेन 
जलायी जातीं हैं..... 

सब उजाले में रहना, देख रहे हो तुम लोग जो भी अंधेरे 
की हद में आया वो मारा गया....वो पास में आ रही है.... पीछे हटो.... रोशनी में रहो..... 
मुझे आगे जाने दो.... मेरे हाथ में लालटेन है.... कोई डर की बात नहीं है..... साहिल जैसे ही.... थोड़ा अंधेरे में आता है.... चुड़ेल उसे पकड़ती है ....साहिल बड़ी फुर्ती 
से एक हाथ से केरोसिन की लालटेने जोर से मारता है.... दूसरे हाथ से उसका मास्क निकाल देता है ....उसके ऊपर मुँह में आग ही आग भभक जाती है .....वो बड़े जोर 
से चीत्कार करती है.... अंत हो जाता है।

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     कहानीकार -रजनी कटारे
           जबलपुर (म.प्र.)