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कल कल करती सरिता तुम हो,
मेरे जीवन की रागिनी और कविता तुम हो,
तुमसे ही रौशन मेरा घर जहान है,
तुम मेरे दिल की मल्लिका---
मेरी मोहब्बत मेरा अरमान हो,
इन कत्थई आंखों का मैं दीवाना हो रहा हूं,
तेरी सादगी का मै परवाना हो रहा हूं,
अर्धांगिनी तुम मेरी तुम मेरा मान हो,
सात जन्म के बंधन का तुम मेरा अरमान हो,
संगीता वर्मा✍✍

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