*** प्रेम करता है पुनर्जीवित स्मृतियों को और खींच लाता है वहीं पर जहां से विस्मृतियों का आवरण कर रहा था अतिरेक, लांघता नहीं है सीमाओं का समंदर पर रोक भी नहीं पाता आकाश का अवरोध चांद को मिल जाता है बहाना ईद पर मिलाने का ! *** हरिचरण अहरवाल 'निर्दोष'