कैसे कह दू कि तुम याद नही आती हो ,
कैसे बोल दू झूठ कि तुम याद नही आती हो ।
जब देखती हू किसी बच्चे को कोने मे
सिसकते हुए , तुम बहुत याद आती हो ।
जब रात को तकिया गीला करती है आँखे ,
जब भर आता है दिल मेरा ,
तुम बहुत याद आती हो ।
खोल दू जिसके सामने दिल अपना
जब नही मिलता वो अपना तो तुम बहुत याद आती हो ।
हर पल हर समय हर लम्हा तुम बहुत याद आती हो, कैसे कह दू मैं झूठ कि तुम याद नही आती हो
माँ मेरी माँ तुम बहुत याद आती हो!
श्वेता अरोडा

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