आओ अब गुनाह कर लें

बहुत हुआ सीधी राह चलना
आओ अब टेढ़ी राह चल लें
शब्दों को हथियार बना 
कलम से अब वार कर लें
आओ अब गुनाह कर लें

चल रहें हैं जो शब्द रेंग रेंग कर
नवस्फूर्ति नव ऊर्जा का संचार कर लें
धराशाई हो जाए दुश्मन
शब्द बाणों पर पैनी धार कर लें
आओ अब गुनाह कर लें

गुमनामी से बदनामी भली
खुद को अब बदनाम कर लें
हताशा में जीकर क्यों मरना
थोड़ा खुद के खातिर भी जीकर मर लें
आओ अब गुनाह कर लें

प्रेम भरा संदेश बहुत लिख चूके
अब पंक्तियों से अपनी कत्लेआम कर लें
जो सुनते नहीं चिल्लाने पर भी
उनके दिलों पर गहरी चोट कर लें
आओ अब गुनाह कर लें।।

सीधी उंगली से घी कहां निकलता है
आओ अब उंगली टेढ़ी कर लें
बहुत हुई नेताओं की भाषणबाजी
सब मिल अब उन्हें नंगा कर लें
आओ अब गुनाह कर लें।।

वो(नेता और गुंडे) कत्ल करके भी बदनाम ना हुए
हमने थोड़ी सी कलम क्या चला दी पिंटू
वो(नेता और गुंडे) सजाए मौत का फरमान दे गए।।

प्यारे प्यारे लेखकों को समर्पित 🙏🙏🙏
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐