खुशी जल्दी - जल्दी काॅलेज के लिए निकलती है ताकि उसकी बस ना छूट जाएं । वह जैसे ही बस स्टाॅप पर पहुॅंचती है उसकी बस उसे दूर जाती हुई दिखाई देती है ।
धत तेरी की .... एक मिनट से मेरी बस छूट गई ।
अब कैसे काॅलेज पहुॅंचू ?? दूसरी बस तो आधे घंटे बाद आती है और मुझे अपना असाइनमेंट आज ग्यारह बजे से पहले सबमिट करना है । साढ़े दस तो ऑलरेडी हो चुके है । हे शिवजी ! मुझे किसी भी तरह ग्यारह बजे तक काॅलेज पहुॅंचा दीजिए । यदि आप ऐसा कर देते हैं तो मैं इस साल श्रावन महीने की दो सोमवारी का व्रत रखूंगी ।
खुशी यह सोचती ही रहती है कि तभी उसे एक दूसरी बस दूर से आती हुई दिखाई पड़ती है । वह खुशी से उछल पड़ती है कहती है कि शिव जी ने इतनी जल्दी मेरी बात सुन भी ली और उसे पूरा करने का साधन भी भेज दिया । थैंक्यू शिवजी । वैसे तों मुझे भूख बर्दाश्त नहीं होती लेकिन मैंने जो आपसे कहा है वह जरूर पूरी करूंगी क्योंकि
" मेरा नाम है खुशी
मेरे लिए कुछ भी नहीं है नामुमकिन "
खुशी बस को रोकती है और उस बस में चढ़ जाती है । खुशी को पहले तो कोई भी सीट खाली नहीं दिखाई देती है लेकिन जब वह दुबारा ध्यान से देखती है तो पीछे से एक आगे वाली खिड़की के तरफ की सीट उसे खाली दिखाई देती है । वह उस सीट के पास पहुॅंच जाती है और सीट के पास वाले लड़के से कहती है कि वह बाहर आ जाएं क्योंकि वह उस खिड़की वाली सीट पर बैठेगी । लड़का आश्चर्य से खुशी को देखता है फिर कहता है कि लगता है आप पहली बार इस बस पर सवारी कर रही है ??
खुशी कहती है हाॅं ! मैं पहली बार इस बस में चढ़ी हूॅं
लड़का मुस्कराया और बोला तभी तो मैं सोचूं आप इस सीट पर क्यों बैठना चाहती है ??
खुशी को कुछ समझ में नहीं आता कि वह लड़का क्या बोले जा रहा है ?
कंडक्टर खुशी के पास आता है और कहता है कि मैडम ! मैं आपके लिए कोई दूसरी सीट की व्यवस्था करता हूॅं लेकिन आप इस सीट पर नहीं बैठिए ।
खुशी को आश्चर्य होता है कि कंडक्टर भी उसे ही मना कर रहा है जबकि वह सीट तो खाली हैं ।
कंडक्टर खुशी की बात समझ कर कहता है कि यह सीट किसी की रिजर्व सीट है इसकारण कोई नहीं बैठता है । खुशी को हंसी आ जाती है और कहती है कि कोई बात नहीं जब वह पैसेंजर आएगा मैं उठ जाऊंगी ।
कंडक्टर कहता है कि मैडम आप समझ नहीं रही है दरअसल बात यह है कि यह सीट एक लड़के की है जों अगली स्टाॅप पर चढ़ेगा । उसे आते हुए हम सब देखते हैं लेकिन सीट पर बैठने के बाद वह किसी को नहीं दिखता है । उसने कह रखा है कि वह उसकी सीट है जिसपर कोई नहीं बैठना चाहिए । अगर कोई इस सीट पर बैठता है तों मैं उसे मृत्युलोक पहुॅंचा दूंगा ।
खुशी जोर से हॅंसने लगती है और कहती है कि आप सब एक लड़के की धमकी से डर गए । कल को मैं अगर आपको मृत्यु लोक पहुॅंचाने की धमकी दूंगी तो जरूरी नहीं कि मैं आपकों पहुॅंचा ही दूं ।
कंडक्टर कहता है आप समझ नहीं रही है मैडम । वह आप और मेरी तरह मेरा मतलब है हमारी तरह नहीं है । सब कहते हैं वह लड़का पिशाच बन चुका है । पहले जब वह जिंदा था तब इसी बस से अपनी कोचिंग जाता था । एक दिन बस में इसी सीट के लिए उसकी लड़ाई एक गुंडे से हों गई। दूसरे दिन हमें पता चला कि उस गुंडे ने उसको मार दिया है ।
खुशी ने कहा कि आपको किसने कहा कि वह मर चुका है ?
कंडक्टर ने कहा कि पुलिस को उस लड़के की लाश मिली थी और वह इस बस में रोज आता - जाता था इसलिए पुलिस पुछताछ करने बस में आई थी और शिनाख्त के लिए भी मैं और इस बस के कुछ रेगुलर यात्री गए थे। हमने देखा था वहीं लड़का था ।
इस घटना के दस दिन बाद से ही वह इस बस में चढ़ता है और इसी सीट पर आकर बैठ जाता है ।
पहले दिन ही उसने कहा था कि अगर इस सीट को खाली रखा जाएं तों वह किसी का नुक़सान नहीं करेगा । यही कारण है कि हम सब आपको उस सीट पर बैठने से मना कर रहें हैं ।
खुशी एक पल को घबरा जाती है लेकिन अगले ही पल वह कंडक्टर से कहती है कि वह शिवजी की परम भक्त है और भूत-प्रेत और पिशाच बस कहानियों में ही मिलते हैं । रियल लाइफ में कोई भी भूत - प्रेत और पिशाच होते ही नहीं है ।
यह कहकर खुशी उस आदमी के पैरों के पास से गुजर कर उस सीट पर बैठ जाती हैं । सब आश्चर्य से खुशी की तरफ देखते हैं ।
अचानक ही बस की ब्रेक लगती है और एक लड़का खुशी को अपनी तरफ आते दिखता है । इसी बीच खुशी का फोन बजने लगता है और वह फोन में बिजी हो जाती है ।
दो मिनट बाद वह अपनी नजरों से पूरी बस में बैठ हुए यात्रियों को देखती है लेकिन वह लड़का उसे नहीं दिखाई देता है । खुशी को लगता है कि बस में सीट खाली नहीं होने के कारण वह उतर गया होगा ।
खुशी काॅलेज के गेट से पचास मीटर की दूरी पर बस से उतर कर अपनी काॅलेज की तरफ जाने ही वाली होती है कि तभी उसके सामने वह लड़का अचानक से आकर खड़ा हो जाता है ।
खुशी घबरा कर पीछे हटती है और गुस्से में कहती है कि किसी के भी सामने आने का यह क्या तरीका है ??
वह लड़का कुछ नहीं बोलता बस खुशी को देखते हुए मुस्कुरा रहा भर होता है । खुशी जब ध्यान से देखती है तो उसे उस लड़के का चेहरा जाना - पहचाना दिखता है ।
खुशी को याद आता है कि यही तो बस में चढ़ा था जब बस अचानक से रूक गई थी । खुशी कुछ बोलने ही वाली होती है कि वह लड़का खुशी को देखते हुए कहता है कि उसे उसकी सीट पर नहीं बैठना चाहिए था ।
खुशी को कंडक्टर की बात याद आती है । अंदर से डर रही लेकिन बाहर से अपने आप को मजबूत करते हुए खुशी कहती है कि उसे भूत-प्रेत और पिशाचों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है ।
वह लड़का उसे देखकर जोर से हॅंसने लगा । वह कहता है कि सामने देख रही हो फिर भी ....
खुशी कहती हैं कि हो सकता है बस में तुम्हें रोज सीट मिल जाए इसकारण तुम सबको बेवकूफ बना सकते हों लेकिन मुझे नहीं । वह कमर पर हाथ रखते हुए उस लड़के की ऑंखो में देखते हुए कहती है 👇
नाम है मेरा खुशी
मैं ही लोगों को बनाती बेवकूफ
आज तुम ही खुशी को
बनाने चलें हो बेवकूफ "
तुम्हें देखना है तो तुम सही समय पर मेरे पास आई हों ।
मैं आज ही अपना बदला पूरा करने वाला हूॅं । एक एक्सीडेंट की शक्ल देकर उन दो गुंडों ने मुझे मार डाला । आज मैं भी उन्हें मारकर उनकी मौत को एक्सीडेंट घोषित करवा दूंगा । तुम बहुत निडर लड़की हो । तुम मुझसे डर रही हो लेकिन मेरे सामने दिखा नहीं रही और निडरतापूर्वक मेरा सामना भी कर रही हो । हमारे समाज को ऐसी ही लड़कियों की जरूरत है जो अपने पर कोई भी मुसीबत आने पर बचाओ - बचाओ नहीं चिल्ला कर खुद अपने दिमाग से , खुद अपनी आत्मशक्ति की बदौलत इस समाज में छुपे भेड़िए और दरिंदों का सामना मजबूती से कर सकें । मैं भी उन गुंडों से अंतिम सांस तक लड़ा था लेकिन ......
इन एक सालों में मैंने अपने आप को ऐसा बना लिया है कि मैं किसी भी मुसीबत का सामना कर सकता हूॅं ।
मैं अपने माॅं - बाप की गरीबी दूर करना चाहता था लेकिन इन गुंडों ने एक सीट के लिए मुझे मेरे माॅं - बाप से अलग कर दिया। मुझे यह पिशाच योनि पसन्द नहीं लेकिन मेरी मजबूरी है कि मुझे अपना बदला पूरा करने के बाद भी इस रूप में ही रहना पड़ेगा। मेरे साथी तों हजारों साल से इसी रूप में रह रहे हैं लेकिन मैं रहना नहीं चाहता ।
कुछ देर बाद वह लड़का कहता है खैर ... छोड़ो
तुम बस मेरे साथ चलो ।
खुशी की ऑंखें लड़के की बातें सुनकर डबडबा जाती है और ना जाने उस लड़के में क्या आकर्षण था कि वह उसके पीछे-पीछे चल पड़ती है ।
वह लड़का जंगल के बीच के बने एक घर जो अब खंडहर हो चुका है उसमें जाता है । खुशी भी उसके साथ ही है । वह खुशी को दूर ही रहने को कहकर आगे बढ़ता है ।
खुशी देखती है कि उस लड़के के बाल बड़े हों गए हैं । उसके दो दाॅंत बाहर निकल आए हैं । उसके नाखून भी लंबे हों चुके हैं । उसने काला और लंबा कपड़ा पहना हुआ है ।
उस लड़के का हुलिया देखकर खुशी की चीख निकल जाती है । अपने आप को संभालते हुए वह देखती है कि वह लड़का जो अब अपने पिशाच रूप में आ चुका है वह खंभे में बाॅंधे गुंडे की तरफ बढ़ता है और उसके गले पर वार करते हुए उसका खून चूसना शुरू कर देता है । वह उस गुंडे के शरीर का पूरा खून चूस लेता है और थोड़ी देर बाद उस गुंडे की मौत हो जाती है। दूसरे बंधे हुए गुंडे के साथ भी वह ऐसा ही करता है और उसकी भी मौत हों जाती है ।
वह पिशाच उन दोनों मृत गुंडे को अपने कंधों पर रखकर बाहर सड़क की तरफ बढ़ने लगता है । खुशी भी उसके पीछे भाग कर आती है । वह देखती है कि वह पिशाच उन मृत लाशों को आती हुई ट्रक के आगे फेंक देता है ।
जब वह खुशी के पास आता है तों वह पिशाच नहीं बल्कि वह लड़का बन चुका होता है । खुशी से वह कहता है अब तों तुमने देख लिया ना कि मैं कौन हूॅं ?
कल से उस बस की सीट पर मत बैठना । यह कहकर वह चला जाता है और उस लड़के को जंगल की तरफ जाते हुए खुशी देखती रह जाती है ।
अगले दिन खुशी फिर से उस बस में चढ़ती है और उसी सीट पर जाकर बैठ जाती है । कुछ देर बाद वह लड़का आता है और मुस्कुराते हुए उसे देख कर फिर से गायब हो जाती है । खुशी भी मुस्कुरा कर रह जाती है क्योंकि उसे पता होता है कि वह उससे कहाॅं मिलेगा ??
जैसे ही खुशी बस से उतरती है वह फिर से उसके सामने हाजिर हो जाता है लेकिन खुशी पहले दिन की तरह ना तो डरती है और ना ही उसे गुस्सा ही आता है ।
लड़का कहता है कि मेरे मना करने के बाद भी तुम मेरी सीट पर बैठी थी क्या तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता ??
खुशी उसको देख कर कहती है कि नहीं ! मुझे तुमसे डर नही लगता क्योंकि तुम मेरे दोस्त जैसे मुझे दिखते हों ।
इसी दोस्त के रिश्ते के नाते मैं तुम्हारी मदद करना चाहतीं हूॅं । मेरे ताऊजी जो काशी में रहते है मैंने उनसे तुम्हारे बारे में बात की और वह तुम्हें इस पिशाच योनि से मुक्ति दिलाने में मदद करने के लिए तैयार हो गए हैं। हमें अभी काशी के लिए निकलना पड़ेगा । वह लड़का अपनी इस दोस्त को निहारने लगता है ।
खुशी और वह लड़का काशी के प्राचीन पिशाचमोचन कुंड विमल तीर्थ पर खड़े हैं । साथ में खुशी के ताऊजी भी है साथ ही एक महंत खड़े हैं ।
महंत उस लड़के को खुशी और उसके ताऊजी से अलग खड़ा होने को कहता है । वह लड़का खुशी की तरफ देखते हुए अलग खड़ा हो जाता है । अब महंत जी शिव सहस्त्रनाम का पाठ शुरू कर देते हैं । पाठ समाप्त होने के बाद महंत जी उस लड़के से कहते है कि वह जाकर विमल तीर्थ में डुबकी लगा लें ।
वह लड़का महंत जी के कहेनुसार विमल तीर्थ में डुबकी लगाता है और सभी देखते हैं कि एक ज्योति पानी से निकल कर आसमान की तरफ जाती रहती है । महंत जी कहते है कि इसे पिशाच योनि से मुक्ति मिल चुकी है।

धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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