तुझे कितना मना किया था,  जीशान मत मिल उस  राजकुमारी से , और तू फिर भी उससे मिला, मुझे बताए बिना  अच्छा न किया तूने , अब जब मुश्किल आ गयी तो याद आया तुझे  तेरा दोस्त ,अब मैं कुछ नही कर सकता खुद सभाल सब ।
नही जुकारो ऐसा मत कह, तू मेरा भाई मेरा दोस्त सब कुछ हैं, मदद कर दे न मेरी ; कहकर जीशान गिड़गिड़ा रहा था।
अरे अपनी दुनिया मे क्या  ??खूबसूरत लड़कियाँ नही थी- जो तू  पृथ्वी पर रहने बाली राजकुमारी से इश्क कर बैठा ।
वो भी इस हद तक कि वो तेरे बच्चे की माँ बनने बाली है!
जीशान तुम दोनों के अलावा यह बात और कौन जानता है।
कोई नही बस उसकी एक सहेली और कोई नही । 
तू बात कर न बड़ी माँ से निकाल कोई रास्ता ;वो जरूर मेरी रायमा को स्वीकार कर लेंगी , तू करेगा न बात!
देखता हूँ! चल अब तू परेशान न हो कहकर  जुकारो ने उसे ढाढस दे दिया  और चल पड़ा दोस्ती का फर्ज निभाने  बड़ी माँ के महल के बाहर से ही कहलाया की जुकारो मिलना चाहता है रानी माँ से।
तभी अंदर सन्देशा लेकर गयी सेविका उसे अपने साथ लिवा ले गयी।
सामने रानी माँ सिंहासन पर आन वान शान के साथ विराजमान थीं।
जुकारो कैसे आना हुआ ???
रानी माँ का इस्तकबाल बुलन्द हो ,शहजादे की तरफ से सन्देशा है लाया हूँ।
ऐसी कौन सी बात है जो शहजादे खुद न कह सके , और अपने दोस्त को भेज दिया कहने।
कहीं!
फिर से कोई बचकानी हरकत तो नही कर दी।
कुछ ऐसा ही समझिए रानी माँ! कहकर उसने सारी बात बता दी रानी माँ को पर आश्चर्य की सीमा न थी यह देखकर की आज रानी माँ क्रोधित होने की जगह प्रसन्न थी ;और अपने बेटे को शाबासी दे रहीं थी 
बार बार कह रहीं थी जो काम सदियों से कोई न कर पाया वो आज जीशान ने मेरे बेटे ने कर दिया हम अवश्य उसकी पत्नी और इस कुल को बारिश देने बाली उस राजकुमारी को अपनाएंगे ।
राजकुमारी के पिता को यह खबर पहुँचवा दो ,की हम उनकी पुत्री को शैतान वंश के बड़े राजपुत्र की पत्नी बनाना चाहते हैं।
जी महारानी जैसी आपकी आज्, कहकर वह तुरन्त पृथ्वी पर बसे सुंदर प्रदेश रायगढ़ पहुँच गया सारी बात वहां के राजा  शिवदत्त को बताई और वो तिलमिला उठे ।
इतना दुःसाहस की हमारी पुत्री के लिए तुम एक शैतान का हाथ मांगने चले आए लौट जाओ इसी छण !
तभी रायमा ने पिताजी के आगे हाथ जोड़ दिए सारा हाल कह सुनाया की वो जीशान से प्रेम करती है; और वो भी उसे चाहता है ;और उसके गर्भ में उन दोनों का प्रेम अंश पल रहा है।
सुनकर महाराज दंग रह गए  यह क्या!???? किया तुमने राजकुमारी एक विनाश को आमन्त्रित कर लिया अपने गर्भ में ।
नही हम यह नही होने देंगे लौट जाओ तुम सेवक हम कोई विवाह नही 
करेंगे ;तुम्हारे राजकुमार के साथ राजकुमारी का।
सेवक लौट गया।
राजा ने तुरंत रानी को गर्भ  को नष्ट कराने को कहा।
पर उसी रात रायमा महल से गायब हो गयी फिर कभी न लौटी ।
वह बन गयी शैतानी दुनिया के राजकुमार की पत्नी; और उसने जन्म दिया एक  सुंदर स्वस्थ शिशु को जो अन्य साधारण शिशुओं की भाँति
न बढ़कर उनसे दोगुनी रफ्तार से बड़ा हुआ; रानी ने उसका नाम रखा डेविड।
वह बहुत अधिक शक्तिशाली था। 16 वर्ष की अवस्था मे सारी कलाओं में पारंगत हो गया, इतना क्रूर और निर्दयी को स्वयं क्रूरता, निर्दयता कांप उठती उसे देखकर।
रानी माँ के सानिध्य का नतीजा था वह दिन पर दिन दुराचारी हो गया कोई भी उसे रोकने में असमर्थ था।
जिस जवान बेटी बहु की देख लेता वो; उसे अपनी ऐशगाह में चाहिए उसे।
अगर किसी की सुनता तो बड़ी रानी माँ यानी अपनी दादी की ।
पिता को तो गिनता ही न था।
बड़ी रानी के स्वर्ग सिधार जाने पर वह निरंकुश हो गया, और भी दुष्ट।
आज माँ से कहने आया था कुछ , बोला माँ पृथ्वी पर एक सुंदर शहर है रायगढ़ वहाँ के राजा की पुत्री से मैं विवाह करना चाहता हूं; आप भी उस परिवार से है; शीघ्रता से जाकर बात करें।
अगर वो इसके लिए तैयार न हो तो कह देना परिणाम को तैयार रहें।
तुम जिद मत करो डेविड वो नही मानेंगे ;सालों पहले भी यही हुआ था ,
आज भी वही होगा।
ठीक है फिर मै अपने तरीके से मन वाऊंगा ।
तुम कुछ नही करोगे डेविड।
मैं बहुत कुछ करूँगा देखो! सुबह क्या होता।
भोर की पहली किरण के साथ डेविड पहुँच गया सेना लेकर ;और प्रस्ताव रखा या तो अपनी बेटी से मेरा पाणिग्रहण कर दो; या युद्ध।
ऐसी  दुःसाहस की बात सुनकर राजा जयराम जो डेविड  के मामा थे युद्ध को तैयार हो गए।
घमासान युद्ध छिड़ गया; "डेविड"  आखिर युद्ध जीत गया !क्योंकि उस पर कोई तीर तलवार अस्त्र असर ही न करता था।
युद्ध जीतते ही उसने सभी जवान लड़कियों को बन्दी बना लिया ;और जितने भी पुरुष थे उनको ऐसी भयंकर यातनाए दी कि खुद मृत्यु माँगने लगे; अब उसने निश्चय किया वो अपने नाना के इसी नगर में रहेगा उत्तराधिकारी बनके।
जिस राज्य में कभी सुख 'शांति  'न्याय का राज्य था; वहाँ आज निर्दयता विराजमान थीं !
न किसी स्त्री का मान न , कोई शांति हर तरफ घिनोना पन हाहाकार , यह देख डेविड   जोर जोर से हँसता यह है शैतान डेविड की दुनिया  ।
डेविड का विवाह हों रहा आज रायमा के भाई की पुत्री से;  हर तरफ धूमधाम मची आज 27 साल बाद रायमा लौटी अपने पितृगृह पर यह क्या सारी काया ही पलट गई।
जिस नगर में कभी सुख शांति का निवास था।उस स्वर्ग सी सुंदर नगरी में आज विवशता लाचारी, थी प्रत्येक चेहरे पर ।
और रायमा मो देखकर सबने मुँह फेर लिया घृणा से ।
अपने लिए सबकी नजरों में घृणा देखकर जीते जी मर गयी! रायमा और अपने द्वारा सालों पहले लिए गए निर्णय पर आँसू बहाने के अलावा कुछ न था।
उसी निर्णय का परिणाम था क्रूर शैतान डेविड ।
आज वह जान गयी थी क्यों??? रानी माँ ने उसे स्वीकार किया था । उसे नही उसके गर्भ में पल रहे अपने वंश के शासक को अपनाया था।
क्योंकि !उसने सुना था रानी माँ को कहते;--  एक पृथ्वी वासी, और एक शैतान के मिलन से जो जन्म लेगा मेरा वह शासक कभी किसी से न हारेगा;   बनेगा इस शैतानी दुनिया का कुटिल निर्दयी शासक।
तभी  जीशान ने रायमा को पुकारा चलो पाणिग्रहण का समय हो गया।
रायमा ने जीशान से कहा रोक दो उस दुष्ट को! और निर्दयता न दिखाए;
इतनी छोटी बच्ची का जीवन नरक न करे!
जीशान रम्या पर चीख उठा पागल औरत तू नही चाहती !एक पृथ्वी वासी और शैतान के मिलन से हमारे कुल का निमार्ण हो और डेविड की यह शैतानी दुनिया एक दिन सारे संसार पर राज्य करे।
रायमा आश्चर्य से देखती हुई    क्या कहा तुमने????
क्या तुम ने जानबूझकर किया यह सब एक साजिश के तहत विवाह किया मुझसे और मैं समझती रही यह प्रेम था तुम्हारा।
Hahaha पागल औरत हम शैतान हैं किसी से प्रेम नही करते !चल चलके साथ दे हमारी शैतानी दुनिया के निर्माण में।
रायमा वोझिल कदमो से बड़ चली मंडप की ओर अपने मन मे आंधी समेटे , एक खामोश तूफान की तरह पहुँच गयी वो मंडप पर; डेविड के बराबर मे उससे उम्र में14 साल छोटी मासूम बच्चों को देखकर न जाने कब उसके हाथ  अपने कमर में बंधे खंजर पर पहुँच गए और पाणिग्रहण की बेदी रक्त रंजित हो उठी हर कोई सन्न रह गया! डेविड कुछ पल छटपटा कर वहीं ढेर ही गया।
उसके मरते ही सारे शैतान भाग गए ।
सब दंग रह गए जीशान चीखा क्या??? किया तूने !क्रूर औरत यह निर्दयी कैसा निर्णय लिया।
जोर से हँसी !---जो सालों पहले लेना चाहिए था ;तुम्हारी  कुटिलता पर जब तुम मुझे रात के अंधेरे में ले जाने आए थे; काश न जाती; और यह कटार तब उठायी होती- तो लोगों को इतना कष्ट न उठाना पड़ता -इस क्रूर शैतान की दुनिया मे ।
यों खत्म न होती मेरे पितृगृह की सुख शान्ति।
हम बेटियां जब ससुराल जाती तो दुआएँ देती जाती ;मायका फले फुले पर मै अभागिन सब कुछ नष्ट करने का कारण बन गयी! पर अब कोई भी दुष्ट न वसा सकेगा शैतानी नगरी न उजाड़ सकेगा मेरे बाबुल का आँगन।
पर तुमने कैसे मारा उसे वो तो दो शक्तियों से मिलकर बना था।
सुना था मैंने तुम्हारी माँ से; उसकी मृत्यु का राज एक रात चुपचाप जब वो तुम्हे बता रही थी , कि वह  दो ही लोगों के हाथ मरेगा जिसने मिलकर उसकी शैतानी ताकत का निर्माण किया।
वो दो है उसके माँ बाप यानि मैं और तुम।
सुनकर जीशान वही गिर गया।
औऱ रायमा ने सभी बन्दी ग्रह से निकालकर फिर सुन्दर राज्य का निर्माण किया ।
औऱ मुक्ति दिलाई शैतानी दुनिया से अपने गृहनगर को।
वहीं ठहर गयी वो सदा के लिए ।
एक बेटी ने फर्ज निभाया फिर  से सुखद कर दिया अपना नगर।

अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।