मनुष्य का जीवन एक किताब की तरह है। अपने जीवन में मनुष्य ज्ञान लेने के लिए किताब का अध्ययन करता है। धार्मिक किताबें,ज्ञानवर्धक,मनोरंजन महापुरुषों के जीवन से जुड़ी किताबें। जिनका अध्ययन कर वह नीतिपूर्ण विचारों को ग्रहण करता है। किताब हमारे जीवन की सच्ची सखा होती है। अब बात करते हैं हम "हमारे जीवन के किताब" की जिसके रचयिता स्वयं हम होते हैं। जैसा जीवन में हम कर्म करते हैं वैसे ही फल हमें प्राप्त होते हैं और हमारे जीवन की किताब में दर्ज होता जाता है।जन्म-मरण ईश्वर द्वारा प्रदत्त अटल सत्य है,जिसे कोई नकार नहीं सकता।
किंतु इस मध्य की अवधि में हम अपने कर्मों द्वारा इसे संपूर्ण करते हैं,यदि मनुष्य बुरे कर्म करता है तो उसे उसकी सजा भी मिलती है,और यदि वह नेक कर्म करता है।सबकी भलाई सोचता है तो उसे जीवन में अच्छाई ही मिलती है। इसलिए कहा भी गया है...........
" कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन "
( कर्म करते रहो फल की चिंता मत करो )
हमारा जीवन कर्मों का लेखों-जोखा ही तो है।जिसे हमे जिंदगी की किताब में भरते जाना है।सकारात्मक विचार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि हम छोटी-छोटी खुशियों को जी भर कर जी ले तो, बड़ी खुशी का इंतजार हमें नहीं रहेगा।हम जो भी स्थिति है उसी में ही खुशी का अनुभव करेंगे। क्योंकि खुश रहना भी हम सबके जीवन की सबसे बड़ी स्वयं की जिम्मेदारी है।अंत में यही कहूंगी जीवन सतत चलने का नाम है। बस हमें अपना कर्म करते जाना है उसका अच्छा फल हमें स्वत: ही मिलेगा और हमारे जीवन की किताब सदा संपूर्ण ही रहेगी।
जीवन 💐💐अच्छे कर्मों की संपूर्णता 💐💐 मृत्यु
💐 जीवनपथ पर,तू निकला मानव
कर्मों का जो होता, है खेल यहां
किताब,अपने जीवन की लिखते
सत्कर्मों से मिले,नेक जीवन यहां 💐
🙏 जय सीताराम 💐 जय राधेकृष्णा 🙏
✍️ मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)

0 टिप्पणियाँ