पुत्र मोह
सीमा स्कूल से आकर बैग को टेबल पर रखकर वही सोफे पर बैठ जाती है तभी उसकी सहेली विभा का फ़ोन आता है कि उसकी बहू सरला को बेटा हुआ है।
सीमा उसे लड़के के जन्म की बधाई देती है।
विभा उनसे कहती है -- "कितनी कोशिशों के बाद कुल का चिराग पैदा हुआ है। बहू ने दो बार गर्भपात कराया क्योंकि उसकी कोख में कन्या भ्रूण पल रहा था।
इस बार वह जब गर्भवती हुई तो इस बार भी बिना देर किए समय से अल्ट्रासाउंड टेस्ट द्वारा लिंग जाँच कराने पर पता चला कि गर्भस्थ शिशु लड़का है तो पूरे परिवार के चेहरे पर खुशी की चमक आ गई। पूरे समय हम सबने बहु का खूब ख्याल रखा। आज मुझे जो खुशी मिल रही है मैं तुम्हें नहीं बता सकती।" अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ। कहकर उसने फ़ोन रख दिया।
सीमा अपने मन में सोचती है।विभा सरकारी नौकरी करती है। उसका बेटा क्लास वन अफ़सर है।बहू भी प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करती है ल
लेकिन ये लोग अभी भी अठारहवीं सदी में जी रहे हैं जब ये लोग शिक्षित होकर भी लड़के-लड़की में भेद करते हैं तो गरीब अनपढ़ लोगों से कोई क्या उम्मीद कर सकता है।
लोग गर्व से बताते हैं कि हमनें टेस्ट करवाया ,लड़की है अबॉर्शन कर दिया और यदि लड़का है तो खुशी से फूले नहीं समाए।
हमारे समाज की ये विडंबना कब खत्म होगी?
नई दिल्ली

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