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यूं तो गुजर रहे हैं हर लम्हा हर दिन---
कमी नहीं किसी बात की
आशीर्वाद है मां तेरा हर दिन,
फिर भी याद कभी-कभी तेरी सताती है---
मां तेरी याद बहुत आती है,

आईने के सामने देखती हूं जब खुद को---
कभी चेहरे में कभी आंखों में 
एक तेरी झलक नजर आती है
तब मां तेरी याद बड़ी सताती है,

मां एक एहसास है वह कहीं नहीं है---
दिल के आसपास  है,
तेरे एहसासों को आज भी मैं जिया करती हूं---
हर तीज पर त्यौहार पर याद हमेशा करती हूं?

सादा तरकारी में भी एक स्वाद नजर आता था,
माँ तेरे हाथों से जादू सा बिखर जाता था,
जाने वाले न जाने कहां चले जाते हैं---
बस अपने पीछे कुछ यादें दे जाते हैं।

संगीता वर्मा✍✍