लाल जोड़े में सजी।।
सप्त वेदी पर खड़ी।
वेद मंत्रों द्वारा।
सात फेरे ले रही अग्नि के।
हाथ में इनका हाथ।
बन्ध गठबंधन का साथ।
मात पिता के आशीर्वाद से।
कदम बढ़ा कर सात वचन भर रही।
कन्या दान करें कर जोड़े।
माता-पिता और मामा मेरे।
दे दिया इनके हाथ।
वचन निभाकर दोनों रहो आबाद।
मैं नजरें नीचे झुकाए।
ये सिन्दूर माथे लगाए।
सदा सुहागन बन।
लिया सब से आशीर्वाद।
आँखों में नीर लिए ।
आ गई घड़ी वो
होने लगी विदाई।
सबने पराया कर दिया आज।
पिया के संग बंधी।
प्रीत की डोर।
फिर मुस्काई मुरझाई कली।
करते उस पर सब नाज।

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