मत पूछो कोई मेरी परिभाषा
जो लिखा बस हृदय से लिखा
दिमाग की नहीं है इसमें भाषा,
हृदय है शब्दों की झंकार
और लेखनी देती है मेरे
अथाह प्रेम की परिभाषा,
क्यों बोते हो इसमें अपने
दिमागी भाव?
भावनाएं हैं यहां मन के
संजोए है जिन्हें हमने कई बार,
यदि हृदय दिमाग से चलता
तो ना कविताएं होती 
ना भावनाएं होती ,
ना एक खुबसूरत रिश्ता होता
ना हम आज यहां पन्नों में होते,
बस सच कहें तो हम भी तब निद्रा
में होते,
नींद भले तब पूरा होता
पर जीवन मेरा अधूरा होता,
ना हम प्रेम को समझ पाते
सच कहें तो परिभाषा मेरा अधूरा होता।।


प्रिया❤️✍️