मानस  भी अपनी भाभी को हमारे रिश्ते के बारे में सब समझा दिया। तो भाभी को पश्चयताप हुआ बेकार में गलत सोच रही थी । 4 दिन हो गए मानस दिखाई नहीं दिया।मेरे मन में तरह तरह के सवाल आ जा रहे थे ,कहीं भाभी मिलने से मना तो नहीं कर दी....या वो चला तो नहीं गया इस शहर को छोड़कर।  मन किसी काम में नहीं लग रहा था।उसी के बारे में सोच रही थी दिल कह रहा था ये प्यार है पर दिमाग कह रहा था ये दोस्ती है इस उथल पुथल में खोई हुई थी।.....???.......  
"अंजली"......   बेटा तुम्हें क्या हो गया है।पापा ने प्यार से सिर पे हाथ फेरते हुए कहा।मैं मुस्कुराते हुए बोली नहीं "पापा"कुछ नहीं हुआ।फिर पापा बोले बैंक का फॉर्म निकला है मैं चाहता हूँ तुम बैंक की तैयारी करो।मैं बोली जी पापा ठीक है।फिर शाम को पापा फ़ॉर्म लेके आये मैं फॉर्म भरी और परीक्षा की तैयारी में लग गयी ।
शाम को जब मैं घर के बाहर टहल रही थी तो अचानक मानस को अपनी ओर आते देखा मेरे पास आते ही उसने कहा "कैसी"हो अंजली तो मैं नाराज़गी जाहिर करते हुए बोली कहा चले गए थे तुम???? बिना बताए तुम्हें पता है कितना याद कर रही थी तुमको.... मैं एक ही सांस में सब कह गयी...........।मानस ने कहा "अच्छा"गलती हो गयी अब कहीं भी जाऊँगा तो बता के जाऊँगा और मुझे देखकर मुस्कुरा दिया।। मैं झेंप गयी।  मैं तो एक रिश्तेदार के यहाँ गया था। 
दूसरे दिन शाम को मानस मे्रे घर आया औरबोलाकि भाभी तुम्हें बुला रही है। मैं डर गई, परंतु अपने चेहरे से डर को छिपाते हुए धीरे से बोली "क्यों" बुला रही है।
तो उसने हँसते हुएकहा"अरे" कुछ नहीं बस यूँ ही भाभी तुमसे मिलना चाहती है।
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फिर मैं माँ से कहकर मानस के साथ उसके घर की ओर चल दी मानस ने कॉल बेल बजायी तो भाभी दरवाजा खोली मुझे देखकर उन्होंने कहा "आओ.......अंदर.....आओ मैं  तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी ।मैं अंदर आयी तो भाभी बोली बड़े प्यार से बोली बैठो अंजली मैं सोफा पे बैठ गयी ,मानस भी बैठ गया।भाभी बोली तुमलोग बात करो मैं चाय बना कर लाती हूँ। 
मैं बोली नहीं???...क्यों तकलीफ कर रहीं हैं तो वो बोली अरे तकलीफ कैसी ... मैं अभी आती हूँ , कहकर भाभी किचन की ओर चली गई।

********************** मैं और मानस एक दूसरे को देख कर थोड़ा मुस्कुराये मानस बोला "डरो मत"भाभी तुम्हारा इंटरव्यू नहीं लेगी और जोर से हँस पड़ा मैं भी हँस दी
क्रमशः######*******

ऋचा कर्ण