मेरी माँ तुम्हारी बहुत याद आती है।

हर तकलीफ में तेरी गोद मिल जाया करती थी।
सर पर रखे तेरे हाथ से हिम्मत बंध जाया करती थी।।
मेरी माँ तेरी...........

बेटी की हर ख्वाहिश को सिर्फ माँ ही पूरा करती है।
एक माँ ही होती है जो हर पल हर वक्त साथ होने का एहसास कराती है।।
मेरी माँ तेरी..............

अपने हाथ से खिलाये गए हर निबाले में दुनिया की हकीकत से रूबरू कराती है।
और अपने स्नेह की खुशबू से मेरी पूरी दुनिया ही महकाती है।।
मेरी माँ तेरी.................

तेरी चूड़ियां पहन कर जब इतराती थी,तो तेरी नजरों में रानी बन जाती थी।
तेरी साड़ियों की खुशबू से तुझे महसूस करती थी, तेरी परिछाई हूँ मैं ये रोज एहसास कराती थी।।
मेरी माँ तेरी............

पालती है तू जिसको बड़े ही लाड़ प्यार से उसको ही किसी और के हवाले के पत्नी धर्म सिखाती है।
और अपनी बेटी को सहनशक्ति और संस्कारों की धुरी बनाती है।।
मेरी माँ तेरी बहुत याद आती है।
मेरी माँ तेरी बहुत याद आती है

शीला द्विवेदी (अक्षरा)
 उरई, जालौन ,उत्तर प्रदेश