******तभी भाभी हाथ में चाय की ट्रे लेकर आयी औऱ टेबल पर रख दी ।धीरे-धीरे हमलोग बातों में मशगुल हो गए। मैं बोली भैया नहीं दिखाई दें रहे है। तो वो बोली ऑफिस  गये हैं। लेट सेआते हैं।**********
बातों का सिलसिला जारी था ।.......................
"अचानक " भाभी  मुझसे पूछी तुम मानस को पसंद करती हो मैं एकदम से "चोंक" गई औऱ बोली न........न....नहीं हम तो एक अच्छे दोस्त हैं*****
तो क्या ये दोस्ती रिश्ते में नहीं बदल सकती । मैं भाभी के तरफ देखती रह गयी।
मानस भी "अवाक"रह गया।वो बोला भाभी..........
आप क्या कह रही है??????
तो  भाभी मेरी ओर देखते हुए बोली क्यों......????
लड़की अच्छी नहीं है।शर्म के मारे मेरी नज़रे नहीं उठ रही थी।मानस भी कुछ बोल नहीं पा रहा था। भाभी मुस्कुराते हुए हम दोनों को देख रही थी । मैं उठी और बोली अब मुझे चलना चाहिए। भाभी ने कहा ठीक है फिर आना
मैंने हाँ में सर हिला के अपने घर की ओर चल पड़ी।
"रात" भर भर भाभी  के शब्द कानों  में   गूँजते रहे.. .....
सुबह   माँ  की  आवाज  से  मेरी नींद खुली।
                  दिनभर   सोचती  रही भाभी  के कहे सभी बातों पे।
2 दिन बाद मानस की भाभी  मुझे मंदिर में मिली।
देखते ही बोली   "अरे" अंजली उस दिन के बाद कहाँ 
गम हो गयी   कभी  दिखी नहीं???................
कहीं मेरी बात का बुरा तो नहीं मान गयी ।
            देखो अंजली  मुझे पता है तुम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हो।
............मैं तुम्हारे माँ पापा से बात करूँगी ।
मैं स्तब्ध खड़ी रह गयी  बस इतना बोली अभी नहीं
भाभी।
                क्यों???????
अच्छा ठीक है ।मानस एक हफ्ते के लिए काम
से बाहर जा रहा  है  जब  वो आएगा तो हम बात  करेंगे
...........  मैं सिर्फ मुस्कुरा दी ।
मंदिर से आने के बाद  मैं सोची माँ  को सारी बात बता
दूँ   पर कुछ सोच के चुप रह गयी।
मन में भाभी की बातों से अजीब हलचल हो रही थी
      मानस के बारे में सोच के मन ही मन शर्मा रही
थी मन .........रंग ....बिरंगी...तितलियों की तरह उड़ 
        रहा था।
                        दिल कहता आज मानस सामने
होता तो प्यार का इजहार कर देती।
   एक हफ्ते का इंतजार बहुत लंबा लग रहा था ......।
     "ठंड"     का   मौसम था मैं और माँ   बाहर में बैठ
कर सुनहरी धूप का आनंद ले रहे थे । 
    आर्यनभी  स्कूल से आ गया और धूप में पढ़ाई
कर रहा था ।
                  तभी फोन की """"घंटी"" बजी मैं अंदर 
गई फोन उठायी तो दूसरी तरफ से आवाज आई
                    ""हेलो".......ये......मिस्टर वर्मा
           का  घर है.......??
     मैं बोली..........जी....     ...हाँ....    
                              क्रमशः...............*****

ऋचा कर्ण