मेरे रंगरसिया,ओ मेरे पिया,
तुमसे मेरे जीवन के सारे मौसम रंगीन।
जब तुम मेरे पास रहे,तन से मेरे साथ रहे,
बिछड़कर मन में रहे, बन बैठी तेरी जोगन।
मत पूछा जिया को कैसे झुलसाए तेरा विरहन,
यों लागे जैसे मीन का जल से होया बिछुड़न।
तड़पत, सिसकत , राह निहारत दिन कटे,
आँसू से भीगे अंचरा ,करबट बदलत रैन।
पल उठें , हिलोर जिया में , कैसे सहूँ यह दर्द पिया मैं,
कब आओगे तो बेचैन ह्रदय पावेगा मेरा चैन।
तुम आओ तो तपती दुपहरी पुरुवा बन जाए,
आ जाए मन की सुनी बाबड़ी में नई तरंग।
तुम हो अपने, तुमसे मेरी सारी हकीकत,
तुमसे ही मिलके देखे नयना सपने तेरे संग।
अंग -अंग तेरे नाम के जेवर पहने,
जो कभी जियत न उतरे चढ़ा रूह पर तेरा वो रँग।
तुम आओ तो हो मेरी, दीवाली,
तुम आओ जब रंगरसिया तब हो मेरा होली का हुड़दंग।
अंजू दीक्षित
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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