बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक राज्य है! बिहार प्राचीन समय से ही प्रसिद्ध और समृद्धशाली रहा है!! 
बिहार सदियों तक प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास का " गर्भ गृह " रहा है! बिहार का वर्णन हमारे दो महान ग्रंथों रामायण और महाभारत में भी किया गया है! 

एक ओर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र ने बक्सर के निकट गुरुकुल में ऋषि विश्वामित्र से शिक्षा ग्रहण की थी तो दूसरी ओर बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध और जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर को बिहार की इस ऐतिहासिक भूमि में ही ज्ञान प्राप्त हुआ था!! 
                                              बौद्ध धर्म के लोगों द्वारा यहाँ विहार करने के कारण इस राज्य का नाम बिहार पड़ा!! बिहार प्राचीन काल में ही शिक्षा के क्षेत्र में अग्रसर था, जिसका प्रमाण उस समय के तक्षशिला   विश्वविद्यालय है!! 
सिखों के दसवें और आख़िरी गुरु " गुरु गोविंद सिंह जी " का जन्म भी बिहार की राजधानी पटना में हुआ!! 

प्राचीन इतिहास में बिहार तीन प्रमुख महाजनपद " अंग, मगध और वज्जि संघ " में बँटा हुआ था! 
मगध और लिच्छवि के शासन काल की कार्य पद्धति से ही आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत हुई!! 
अशोक जैसे महान सम्राट ने भी बिहार की धरती पर राज्य किया! 
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह   "अशोक स्तंभ" और राष्ट्रीय ध्वज में "अशोक चक्र" सम्राट अशोक  का ही देन है! इतना ही नहीं बल्कि भारत का "स्वर्ण युग" जिसे कहते हैं वह भी गुप्त सम्राटों की ही देन है और दुनियाँ को " शून्य " देने वाले " आर्यभट्ट " की जन्मभूमि भी बिहार ही है!! 

अगर आधुनिक इतिहास की बात करें तो देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा जाने वाला " 1857 की क्रांति " में अंग्रेजों के नाक में दम करने वाले " बाबू कुंवर सिंह जी"बिहार के ही थे! सत्याग्रह की पहली प्रयोग भूमि बिहार का चंपारण ही रहा है और गाँधी जी यही से महात्मा कहलाये!! 
        बिहार ऐतिहासिक के साथ- साथ साहित्य के क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है! हिंदी साहित्य के विकास में भी बिहार का ऐतिहासिक महत्व रहा है!! 
हिंदी के आदि कवि " सहरपा " बिहार के तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे!! 
आदि कवि " विद्यापति " जी भी बिहार के थे, जिनका प्रभाव " सूरदास " जी की रचना पर भी दिखता है!! 

हिंदी के चार विशिष्ट शैलीकार " राजा राधिका रमन प्रसाद सिंह " ," आचार्य शिवपूजन सहाय " , " रामवृक्ष बेनीपुरी "और "फणीश्वरनाथ रेणु" जी बिहार के ही थे!! 
इनकी रचनाशीलता ने पूरे देश में हिंदी का मान बढ़ाया!! 

आदिकाल से लेकर समकालीन साहित्य तक और रंगमंच से लेकर सिनेमा, हर जगह बिहार ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है!! 
राष्ट्र कवि " रामधारी सिंह दिनकर " जी ने हिंदी साहित्य को एक नई गरिमा प्रदान किया है!! 
एक तरफ " रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, हिमालय और हुंकार "जैसी रचना, तो दूसरी तरफ " उर्वशी " जैसी रचना!! 

गद्य साहित्य में भी बिहार के "  फणीश्वरनाथ रेणु" और " अनूप लाल मंडल" ने भी गहरी छाप छोड़ी!! 
" मैला आँचल " जैसे उपन्यास और " मारे गये गुल्फाम"  जिस पर "तीसरी कसम" फिल्म भी बनी जिसने आंचलिक कला को राष्ट्र व्यापी बनाया!! 

महाकवि कालिदास जी भी बिहार के ही थे, जिन्होंने, "अभिज्ञान शकुंतलम", "कुमार सम्भव", इत्यादि जैसे काव्य की रचना की!! 


बिहार की भूमि प्राचीन काल से ही ऐतिहासिक और साहित्यिक क्षेत्र में उर्वर रही है और वर्तमान समय में भी अग्रसर है!! 

श्वेता कर्ण!!