छोटी पहाड़ी की तलहटी में एक समृद्ध गांव था।खेती ,पशुपालन यहां का मुख्य पेशा था,लोग आपसी सामंजस्य और एकता से रहते थे।
एक बार अचानक गांव में हाहाकार मचने लगा,रात को बाहर बंधे मवेशी गायब होने लगे।
लोग परेशान हो रहे थे,उन्हें लगा शायद कोई बाघ ,चीता जंगल से तो नहीं आकर हमारे मवेशियों का शिकार कर रहा।
अब वे शाम होते ही मवेशियों को घरों के अंदर बांधने लगे।
कुछ दिन बाद खेत से चारा काट कर आ रही,गौरी गायब मिली।
गांव में अब लोगों ने पहरा देने का मन बनाया।लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी, कि कौन पहरा दे।
अंत में राघव नाम का दिलेर बजरंग बली का भक्त इसके लिए तैयार हुआ।
हाथ में टॉर्च,जमींदार के घर से बंदूक,लाठी लेकर वह ,गांव की सीमा पर बैठ गया।
जमींदार ने कहा तुम आवाज लगाना ,कोई आज की रात नही सोएगा ।
राघव बैठा रहा ,रात के करीब 12 बज चुके थे,अचानक एक जोरदार आवाज हुई, चर्र चर्र की आवाज ,ऐसा लग रहा था की कोई बड़ा पेड़ जड़ से उखड़ रहा हो।
उसने देखा सामने की छोटी पहाड़ी एक दानव के रूप में परिवर्तित हो रही थी।असलियत में दिन में जो पहाड़ी वे देखते थे ,वह दानव था जो दिन के समय लेटा रहता था।
रात को वह शिकार के लिए निकलता था।वह उस दानव को देख कर डर गया।उसे समझ में आ गया कि उसे बल से नहीं मारा जा सकता ,उसके लिए बुद्धि और सही सलाह की जरूरत है।
दानव की दो लाल आंखें बहुत भयानक दिख रही थी,और उसकी लप लपाती जीभ शरीर में सिहरन पैदा कर रही थी।वह चल रहा था तो धरती कांप रही थी।
अब राघव ज्यादा देर नहीं रुका ,वह भाग कर घर में घुस गया।
उस दिन दानव को कुछ भी खाने को नहीं मिला।वह बहुत गुस्सा था।खेत खलिहानों को अपने मुंह से आग फेंक कर जलाने लगा।
किसी तरह सुबह हुई।सभी ग्रामीण एक जगह इकट्ठा हुए।जमींदार ने कहा ,कल कौन आया था जिसने हमारी फसलों को बरबाद कर दिया।
राघव कल तुमने आवाज भी नही दी।सब लोग जोर जोर से चिल्ला रहे थे, हां राघव तुम क्या सो गए थे,बड़ी हिम्मती बनते थे।हवा फुस्स हो गई।
राघव ने सबको शांत कराया ,उसने कहा मैं सोया नहीं था ,न ही कोई जानवर न दूसरे गांव से हमारे दुश्मन आते हैं।
ये काम उस पहाड़ी का है।
पहाड़ी का !!!!! सब एक स्वर में बोले।
हां,यह पहाड़ी नहीं ,बल्कि ये दानव लेटा है,जो रात के वक्त शिकार को निकलता है।
श्याम ने कहा ,अच्छा !इसीलिए एक दिन मैं उस पहाड़ी के पास गाय चरा रहा था ,तो वहां बहुत तेज गर्मी महसूस हो रही थी ,जैसे कोई गर्म गर्म आग उगलते सांस ले रहा हो।
लेकिन पहले भी तो ये पहाड़ी थी_कुछ लोगों ने उत्सुकता वश पूछा ।
तभी गांव का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बोल उठा ।मुझे लगता है ,ये दानव कई सालों से सो रहा था,अब इन कुछ दिनों से इसकी नींद खुली है,तो यह भूखा है,।पहले तो इसे मवेशी मिल रहे थे,लेकिन सबने अपने जानवरों को
घर में बांधना शुरू कर दिया,जिससे ये भूखा और क्रोधित हो रहा है ।आगे से इसकी भूख नहीं मिटी तो ये ,पूरे गांव के लोगों को खा लेगा।
पर इससे बचने का क्या उपाय है_सबने एक स्वर में पूछा।
उस व्यक्ति ने कहा ,दिन में यह दानव निष्क्रिय हो जाता है,उस समय ही हम उसको मार सकते हैं।
दोपहर तक कुछ लोग उस लेटे दानव के पास पहुंचे और उसकी आंखें एक गर्म लोहे की छड़ से फोड़ दिया।दानव दर्द से कराहने लगा ,उसकी चीख दूर दूर तक सुनाई पड़ने लगी।वह तड़पता हुआ तेजी से दौड़ा ।
उसे कुछ भी दिख नही रहा था ।
गांव वालों ने रास्ते में खूब सारी लकड़ियां जलाई हुई थी।
दानव उसी में गिर गया ,और मर गया।
इस तरह पहाड़ दानव का आतंक खत्म हुआ।
स्वरचित_संगीता

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