तू वर्षों बाद मिला ,
नजर मिला न सके !
कहना था बहुत कुछ ,
कुछ बता न सके !

जाने कैसे तूने मेरा 
मौन सुन लिया,
तिनका आंखों में चुभा है,
यकीं दिला न सके !

वक़्त का फासला है ,
दर्द छुपाना लाजमी है ,
हाल-ए-दिल जाने क्यूं ,
तुम से छुपा न सके !

तेरे हक में की हुई दुआएं ,
और कुछ खत पुराने ,
मेरे में खजाने में जमा है ,
इसके सिवा कुछ कमा न सके !

तुझे भूलने की अदाकारी ,
कई दफा किया ,
पर आज भी यही सच है ,
तुझे भुला न सके !

.....✍️ पिंकी मिश्रा