अकेलापन वही है,
जब कोई नजर ना आये,
अकेलापन वही है,
जब हर नजारा सूना हो जाये,
है अकेलापन वो भी
जब बहुत दूर साथ चलने के बाद
अकेले लौटना पड़ जाये,
है अकेलापन वो भी
जब बहुत से लोग घेरे हो,
फिर हौले से सब गायब हो जायें,
है अकेलापन वो भी
जब स्वावलंबन के नाम पर
आपको तन्हा छोड़ दिया जाये,
अकेलापन वो भी है
जब आपकी मजबूती के आधार पर
आपकी चिन्ता ही न की जाये,
अकेलापन वो भी है 
जब जरूरत से ज्यादा आपको
समझदार, समझ लिया जाये,
है अकेलापन वो निश्चित ही
जब आपको तन्हा कर दिया जाये,
है अकेलापन वो भी
जब आपके दुख अपनों को
बस नाटक नजर आयें,
अकेलापन वो भी है
जब विश्वास करो बहुत किसी पर
और वो खंजर घौंप जाये,
अकेलापन वो भी है
जब आपकी तरक्की के नाम पर
कोई आप पर जिम्मेदारी सौंप जाये,
अकेलापन वो ही है
जब मस्तिष्क से तन तक की
गतिविधियाँ खुद महसूस की जायें,
अकेलापन वो ही है
जब आपकी खोखली हंसी में
उदासी साफ नजर आये ....।

स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा