एक बच्चा था राजू ।वह बस हर समय अपने दोस्तों के साथ खेलता रहता ,वह अपनी मां से बहुत नफरत करता था ।राजू सोचता था, कि उसकी मां सुंदर क्यों नहीं है ?वहइतनी बदसूरत क्यों है ,?.क्योंकि उसकी मां का आधा चेहरा जला हुआ था ।जिसकी वजह से वह बहुत अजीब लगती थी। राजू बस अपनी मां को बात बात पर डांटता रहता था ।एक बार राजू अपने दोस्तों के साथ बाहर खेल रहा था ।खेलते खेलते बहुत देर हो गई, सोनू की मां सोनू को बुलानेआयी। सोनू बेटा घर चलो बहुत देर हो गई । गोलू बोला मासी थोड़ी देर और खेलने दो ।राजू भी बोला मासी थोड़ी देर और खेलने दो ।थोड़ी देर खेल कर हम खुद आ जाएंगे। सोनू की मां बोली क्या तुम्हारी मां तुम्हें डांटती नहीं ?जब देखो तुम खेलते ही रहते हो पढ़ते लिखते नहीं हो क्या ?राजू बोला मैं तो यहां अपने पिताजी के साथ रहता हूं ,और मेरी मां तो गांव में रहती है ।इतने में राजू की मां राजू को आवाज देते हुए आ जाती है राजू बेटा राजू बेटा कहां हो तुम ?इतनी देर हो गई घर नहीं चलना है क्या ? राजू दूर पेड़ के पीछे छुप जाता है वह पूछती है बच्चों तुमने राजू को देखा है क्या सोनू की मां बोलती है राजू तुम तो कह रहे थे कि तुम्हारी मां यहां नहीं रहती।
राजू की मां बोली सही तो कह रहा है मैं तो अभी अभी गांव से आई हूं राजू मुझे घर पर दिखाई नहीं दिया तो मैं इसको ढूंढने यहां आ गई। राजू बोला मैं आ रहा हूं तुम चलो!
राजू के दोस्त बोलते हैं तुम्हारी मम्मी कितनी डरावनी है। ऐसी कैसी है राजू कुछ नहीं बोलता। बस गुस्से में पैर पटकता हुआघर आ जाता है। घर आकर अपनी मम्मी पर बहुत गुस्सा करता है, बोलता है तुम हर जगह आकर मेरी बेइज्जती करा दी है ।क्या जरूरत थी तुम्हें आने की?
राजू की मां बोलती है बेटा तुम्हें बहुत देर हो गई थी, तो इसलिए मैं तुम्हें बुलाने आ गई थी ।देर हो गई थी मैं क्या बच्चा हूं क्यों आई तुम वहां?
राजू की मां कहती हैआगे से नहीं आऊंगी।और रोने लगती हैराजू बोलता हैयह रोना-धोना बंद करोतुम तो नहीं मानोगी मैं ही यह घर छोड़कर चला जाता हूं ।और ऐसा कहकर राजू घर से बाहर निकल जाता है। उसको कोई फर्क नहीं पड़ता उसकी मां रो रही है ।और वह एक जंगल की तरफ चला जाता है।
वह वहां देखता है एक गाय का बच्चा बहुत रो रहा है।राजू
बोलता है तुम क्यों रो रहे हो ।तुम तो बहुत सुंदर हो तुम्हारी मां भी बहुत सुंदर होगी।गाय का बच्चा बोलता है मैं और मेरी मां नदी किनारे पानी पीने आए थे।नदी में रहने वाले मगरमच्छ मुझे खाने के लिए मेरी तरफ झपटा ।मेरी मां मुझे बचाने के लिए उससे भिड़ गई ,और मर गई।तब से मैं रोज यहां पर अपनी मां को याद कर उसकी याद में रोता हूं ।मां तो मां होती है सब की मां सुंदर ही होती है ।राजू बोलता नहीं मेरी मां सुंदर नहीं है। गाय का बच्चा बोलता है क्या पता कोई वजह रही हो। जो तुम्हारी मां ऐसी हो गई है क्या तुमने कभी कारण जानने की कोशिश की?
राजू बोलता है नहीं मैंने तो कभी नहीं करी। गाय का बच्चा बोलता है मेरसींग जादुई है।इन्हें पकड़कर तुम अपना अतीत देख सकते हो तुम जो चाहे वह देख सकते हो राजू बोलता क्या सच में !
हां हां मैं सही कह रहा हूं।
राजू आंख बंद करके बछड़े के सींग पकड़ता है,और अपने बचपन में चला जाता है वह देखता है कि वह बिल्कुल छोटा सा और अपनी मां की गोद में खेल रहा है ।उसकी मां उसको लोरी सुना रही है।उसकी मां बहुत सुंदर और उसको पाकर बहुत खुश लग रही है। तभी आंधी आती है और मेज पर रखी मोमबत्ती से पर्दे से धीरे-धीरे घर में आग लग जाते हैं राजू कि मांयह देखकर परेशान हो जाती है। वह मदद के लिए चिल्लाती है इतने में ऊपर छत की कडियां भी आग पकड़ लेती हैं वह देखती है एक कड़ी राजू के ऊपर गिरने वाली है ।राजू मेरे बच्चे राजू कहते हुए भागती है ,और राजू को बचा लेती है। उस कडी से उसका मुंह जल जाता है। वह जैसे तैसेराजू को बचाकर बाहर लाती है और बेहोश होकर गिर जाती है ।गांव वाले लोग घर की आग बुझाते हैं ।और उसकी मां को हॉस्पिटल ले जाते हैं ।राजू फूट-फूट कर रोने लगता है और कहता है मैं अपनी मां को कितना गलत समझ रहा था ।बछडा कहता है मां कोई भी हो मां तो सब सुंदर ही होती है
राजू बोलता है मेरी मां मुझे बचाने के लिए बदसूरत हो गई ।और मैं उसको हर समय अपशब्द बोलता रहा।क्या मेरी मां मुझे माफ कर देगी ?बछड़ा बोला मां तो मां होती है, सब कुछ भूल कर अपने बच्चे को गले लगा लेती है ।जाओ अभी देर नही हुई ।मैं तो आज भी अपनी मां से लड़का घर से बाहर आया हूं ।राजू रोता हुआ घर जाता है।और बोलता है मां मां मुझे माफ कर दो मैंने हमेशा आपका दिल दुखाया है ।उसके मां राजू को गले लगा लेती है ।और बोलती है कोई बात नहीं मेरे बच्चे !जब जागो तभी सवेरा है और उसको खूब प्यार करती है।उस दिन के बाद राजू किसी के भी सामने अपनी मां पर बिल्कुल नहीं चिल्लाता और अब अपनी मां की बहुत इज्जत करने लगता है ।आखिरकार मां तो मां ही होती है मां जैसा दिल कहां से लाओगे। वह तो बच्चे की हर गलती को माफ कर गले लगा लेती है
यह मेरी रचना काल्पनिक है। स्वरचित है ।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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